भगवान की श्रेष्ठ रचना हैं मानव शरीर

भारत ऋषि-मुनियों का देश

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की श्रेष्ठ रचना है। मानव शरीर पाने के लिए स्वर्ग में बैठे देवता भी तरसते है। देवाताओं को तो जानें दो, स्वयं परमात्मा भी भारत में किसी माता के उदर से जन्म लेने के लिए हर क्षण ललायित रहते हैं, किंतु राम जैसा पुत्र पाने के लिए कौशल्या जैसी माता और दशरथ जैसे पिता होना चाहिए।

भारत ऋषि-मुनी, तपस्वी-त्यागी महापुरुषों का देश है। सीता सावित्री अनुसूइया, मदालसा, गार्गी जैसे भक्त आदर्श नारियों का देश है, लेकिन आज भैतिकता की चकाचौंध में भारत की नारियों का ही रास्ता बिगड़ गया है। विदेशों की बात जो जाने दो। अपने को सत्य समाज की मानने वाली नारियां किटी पार्टी के ऐसे दलदल में धंस गई है कि वहां से निकलना कठिन है।

इस किटी पार्टी ने भारतीय संस्कृति को जितना नुकसान पहुंचाया है कि इस विषय में कुछ कहा नहीं जा सकता। इसी प्रवाह में एक और धारा बह चली है, अंकल और आंटियों के इन दो शब्दों ने मान-मर्यादा, शिष्टाचार पर इतना आघात किया है कि इसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते।

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हमारे मीठी स्वात्विक संबंधो को इनसे बहुत हानि हो रही है। ये तथा-कथित अंकल-आंटी शब्द समाज के सबसे बड़े अभिशाप है और भारतीय संस्कृति और मर्यादा के दुश्मन है। ये संबंध सारहिन शुष्क गरम रेती के समान है, जिन पर चलने से केवल पैर को जलना ही है।

भारत देश के अलावा कहीं गंगा-जमुना नहीं है, कहीं संत नहीं है, कहीं चरित्र नहीं है। यहां के संतों, तपस्वी व त्यागियों की तुलना में भगवान भी कभी-कभी छोटे पड़ जाते हैं। यहां कितने आते हैं, पलते है और काल के प्रवाह में नष्ट हो जाते हैं।

हमें अपने गौरव, स्वाभिमान को बचाना और संभालना बहुत जरूरी है, क्योंकि इस समय नकल की आंधी चल रही है और हर प्रकार से पाश्चात्य व्यवस्थाएं हमारे जीवन में विष घोल रही है। भारत त्यागी तपस्वियों का देश है।

हमें जीवन भर में किसी संत का आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए, जिससे की हमारा जीवन धन्य हो जाए। भारत का कण-कण पवित्र है। यदि हो सके तो इन सात चीजों को अवश्य संभाल लेना जो भारत में धर्म की सबसे बड़ी धरोहर है, गीता, गौरक्षा, गायत्री, महान रघुवर चरित, गंगाजल, ज्ञानी गुरु, श्यामचित्र। आज हमें इसी भारत में जन्म मिला है और हम भटकते जा रहे हैं

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