लक्ष्मी निवास
- सुरेश शर्मा
दीपावली की आधी रात बीच चुकी थी। लक्ष्मीजी अपने वाहन पर सवार उपयुक्त पात्र को वरदान देने निकल पड़ी।
एक झोपड़ी का दरवाजा बंद था। भीतर-बाहर अँधेरा पसरा हुआ देखकर विस्मय के साथ लक्ष्मीजी ने पूछा, 'दिवाली की रात भी अंधेरा?'
'यह एक गरीब मजदूर का घर है। दिनभर कठोर श्रम करने के बाद भी इसके परिवार का गुजारा नहीं हो पाता। इसीलिए आपका स्वागत नहीं कर पाया बेचारा।' उल्लू ने स्थिति स्पष्ट की तो लक्ष्मीजी ने आगे बढ़ने का इशारा किया।
कुछ दूर चलने के बाद एक घर के आगे केवल एक दीया टिमटिमाता हुआ देखकर वे ठिठकीं। आशय समझकर उल्लू बोला, 'यह एक ईमानदार शासकीय कर्मचारी का घर है। ऊपर की कमाई को हाथ लगाना भी पाप समझता है। इसलिए इसका परिवार गरीबी और अभाव से त्रस्त रहता है। अपनी क्षमता अनुसार ही आपकी सेवा कर संतुष्ट है, देवी।'
लक्ष्मीजी की खामोशी का अर्थ समझकर उल्लू आगे बढ़ लिया। तभी उनकी नजर विद्युत रोशनी से जगमगाते एक भव्य, आलीशान भवन पर पड़ी। वहाँ आतिशबाजी से आसमान तक गूँज रहा था। दर्जनों देशी-विदेशी कारों की लाइन लगी हुई थी। अच्छा खासा शोर मचा हुआ था।
लक्ष्मीजी को खोया हुआ-सा जानकर उल्लू बताने लगा, 'यह एक हवाला और घोटालेबाज का महल है, देवी। इसके पास अपार संपत्ति व काला धन है।' सुनकर लक्ष्मीजी बोलीं, 'तुम मुझे यहीं उतार दो।'
उल्लू, खड़ा-खड़ा लक्ष्मीजी को भीतर जाते हुए देखता रहा।
|
एक झोपड़ी का दरवाजा बंद था। भीतर-बाहर अँधेरा पसरा हुआ देखकर विस्मय के साथ लक्ष्मीजी ने पूछा, 'दिवाली की रात भी अंधेरा?'
'यह एक गरीब मजदूर का घर है। दिनभर कठोर श्रम करने के बाद भी इसके परिवार का गुजारा नहीं हो पाता। इसीलिए आपका स्वागत नहीं कर पाया बेचारा।' उल्लू ने स्थिति स्पष्ट की तो लक्ष्मीजी ने आगे बढ़ने का इशारा किया।
|
|
कुछ दूर चलने के बाद एक घर के आगे केवल एक दीया टिमटिमाता हुआ देखकर वे ठिठकीं। आशय समझकर उल्लू बोला, 'यह एक ईमानदार शासकीय कर्मचारी का घर है। ऊपर की कमाई को हाथ लगाना भी पाप समझता है। इसलिए इसका परिवार गरीबी और अभाव से त्रस्त रहता है। अपनी क्षमता अनुसार ही आपकी सेवा कर संतुष्ट है, देवी।'
लक्ष्मीजी की खामोशी का अर्थ समझकर उल्लू आगे बढ़ लिया। तभी उनकी नजर विद्युत रोशनी से जगमगाते एक भव्य, आलीशान भवन पर पड़ी। वहाँ आतिशबाजी से आसमान तक गूँज रहा था। दर्जनों देशी-विदेशी कारों की लाइन लगी हुई थी। अच्छा खासा शोर मचा हुआ था।
लक्ष्मीजी को खोया हुआ-सा जानकर उल्लू बताने लगा, 'यह एक हवाला और घोटालेबाज का महल है, देवी। इसके पास अपार संपत्ति व काला धन है।' सुनकर लक्ष्मीजी बोलीं, 'तुम मुझे यहीं उतार दो।'
उल्लू, खड़ा-खड़ा लक्ष्मीजी को भीतर जाते हुए देखता रहा।
