Motivational Story : तीन छन्नियां
यह कहानी महान दार्शनिक सुकरात की है। ओशो रजनीश ने अपने किसी प्रवचन में यह कहानी सुनाई थी। आप भी इसे पढ़ें और समझें।
प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात के पास एक परिचित आया और बोला- मैंने आपके दोस्त के बारे में कुछ सुना है।
सुकरात ने कहा- ठहरो, मुझे कुछ बताने से पहले हम एक छोटा सा परीक्षण कर लें, जिसे मैं ‘तीन छन्नियों का परीक्षण’ कहता हूं। इसमें पहली छन्नी सत्य की छन्नी है। क्या आप दावे से यह कह सकते हो कि जो बात तुम बताने जा रहे हो वह पूर्णतः सत्य है?
परिचित ने कहा- नहीं, दरअसल मैंने सुना है कि…'
सुकरात ने कहा- रुको, इसका अर्थ यह है कि तुम पूर्णतः आश्वस्त नहीं हो। चलो, अब दूसरी अच्छाई की छन्नी का प्रयोग करते हैं। मेरे दोस्त के बारे में तुम जो भी बताने जा रहे हो क्या उसमें कोई अच्छी बात है?
परिचित ने कहा- नहीं, बल्कि वह तो…।
सुकरात ने कहा- ठहरो, इसका अर्थ यह है कि उसमें कोई भलाई की बात भी नहीं है। खैर, अंतिम छन्नी का परीक्षण अभी बचा है और वह है उपयोगिता की छन्नी। जो बात तुम मुझे बताने वाले थे, क्या वह मेरे किसी काम की है?
परिचित ने कहा- नहीं, ऐसा तो नहीं है, लेकिन...।
सुकरात ने कहा- बस, हो गया। जो बात न तो सत्य है, न ही अच्छी है और न ही मेरे भलाई की है, तो मैं उसे जानने में अपना कीमती समय क्यों नष्ट करूं?
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हम जीवन में ऐसी कई बातें और कार्य करते हैं जिसका हमारे जीवन से कोई संबंध नहीं रहता है और हम व्यर्थ ही समय बर्बाद करते रहते हैं। समय बहुत कीमती है इसे अपनी और दूसरों की भलाई में लगाएं।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं।
दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।....
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