Bhai Dooj
✕

लघुकथा : एक बेटी की पेंटिंग

Updated: बुधवार, 1 फ़रवरी 2017 (13:46 IST)
छोटी का बाप शराबी था। पूरा शरीर अल्कोहलिक हो चुका था। कई बार कोशिश की कि शराब छुट जाए, लेकिन नहीं छुट पाई।


 
मरणासन्न स्थिति में डॉक्टर ने कहा था कि थोड़ी-थोड़ी शराब देते रहो, नहीं तो इसके अंग बिलकुल भी नहीं चलेंगे।
 
बापू चीख रहा था, छोटी जरा-सी दे दे बेटा, कहीं से ला दे।
 
छोटी को बापू की चीत्कार सहन नहीं हुई।
 
लाज-शर्म छोड़कर वह शराब की दुकान पर गई और बोली एक क्वार्टर दे दो।
 
काउंटर पर बैठा आदमी हड़बड़ा गया कि एक 15 साल की लड़की शराब मांग रही थी और सब शराबियों की नजरें उसकी देह को ललचाई निगाहों से 
 
देख रही थीं।
 
शर्म से गड़ी छोटी अपने बाप की जान बचाने के लिए उन गंदी नजरों का सामना करती हुई शराब लेकर घर आई और बापू को एक गिलास में शराब 
 
दी।
 
शराब पीकर बाप सो गया किंतु मेरे मस्तिष्क में छोटी का कोमल निस्पृह चेहरा घूम रहा था। शराबी बाप की जान बचाने के लिए सिर्फ बेटी ही अपनी 
 
इज्जत दांव पर लगा सकती है और कोई नहीं। उस समय मेरे जेहन में वह पेंटिंग घूम रही थी जिसमें जेल में अपने पिता की जान बचाने के लिए 
 
बेटी उस बूढ़े बाप को अपना स्तनपान कराती है। शायद छोटी भी उसी पेंटिंग का एक हिस्सा थी!
लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

दीप जलें हर द्वार, तभी सजेगा समृद्धि का संसार

अयोध्या दीपोत्सव: आस्था, अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता का पर्वोत्कर्ष

राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस: शुरुआती पहचान और समय पर उपचार से बढ़ सकती हैं स्वस्थ जीवन की संभावनाएं

भारत के लिए ट्रम्प से ज्यादा खतरनाक है डेमोक्रेट्स!

'रसगुल्लों पर चर्चा'

अगला लेख