Motivational Speech : रोज बदल रहा ज्ञान

Motivational speech
अनिरुद्ध जोशी| पुनः संशोधित शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2020 (10:36 IST)
प्रसिद्ध दार्शनिक की एक किताब का नाम है- ‘दि बुक’। उसी से और नीति संबंधी कुछ अंश- वे सारे औरत ब्रांड धर्म जैसे कि इस समय आचरण में लाए जाते हैं, ऐसी खदानें हैं जो खाली हो गई। अब उनकी खुदाई करके कुछ मिलने वाला नहीं।

मनुष्‍य और विश्‍व के संबंध में उनकी अवधारणाएं, उनकी प्रतिमाएं, उनके क्रियाकांड और अच्‍छे जीवन के बारे में उनके जो विश्‍वास है, वे उस विश्‍व के माकूल नहीं है जिसे हम जानते हैं, या कि वे मनुष्‍य के उस जगत से मेल नहीं खाते जो इतनी तेजी से बदल रहा है कि स्‍कूल में हम जो सीखते हैं वह स्‍कूल से उत्‍तीर्ण होने के दिन तक पुराना पड़ चुका होता है।


नीति और नैतिकता ‘जो है’ उससे व्‍यक्‍ति का ध्‍यान हटाकर जो ‘होना चाहिए’ उस पर ले जाती है। झूठे आदर्श पैदा करती है। इन आदर्शों पर वह कभी चल नहीं सकता। इसलिए अक्‍सर देखा गया है कि दया, प्रेम, शांति, करुणा इत्‍यादि का आचरण करने वाले लोग पाखंडी हो जाते हैं। जिनकी वे मदद करना चाहते हैं वे लोग भी उनके ओढ़े हुए कुछ गुणों से दूर भागते हैं। जिस तरह सच्‍चा हास्‍य अपने आप पर हंसना है, वैसे ही सच्‍ची मानवता वह है जिसे आत्‍मज्ञान हो।




और भी पढ़ें :