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मौसम ने करवट बदली है
लखनलाल आरोही नीम के पत्ते झड़ गए पलाश के पेड़ में लग गई आग।कोयल और भौरों ने आम की मंजरियों के साथ गंधा दिए दिशाओं के गात।ओ मेरी उदास प्रिये तुम्हें मालूम नहीं मौसम ने करवट बदली है और इधर तुम्हारी मुस्कान को किसने डँस डाला है? एक बात मैं पूछता हूँ तुमसे-क्या बाहर के मौसम से मन के मौसम का मेल नहीं है? और इसलिए क्या गुलमोहर की आग तुम्हारे होंठों पर नहीं फैली?