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Written By WD

तुम शायद ना आओ लौटकर

फाल्गुनी

साहित्य
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तुम शायद

अब कभी ना आओ लौटकर

चिखती सड़कों पर

जलते-बूझते इश्तहारों की तरह,

खड़ी रहूँगी हमेशा

विज्ञापनों से अटी

बोझ से दबी दीवारों की तरह,

शायद किसी दिन

चस्पा किए जाओ

तुम मुझ पर

परमानेन्टली..

ऑनेस्टली..।
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WD