Poem | कोई दिन ऐसा भी आए
-डॉ. संजीव नाईक
ND
ऐसा भी आ जाए
अखबार जब केवल खुशियाँ बरसाए
न हो कोई खबर किसी अस्मत के लूटने की
न किसी सितारे के, असमय टूटने की
न ताल सूखने की खबर हो
न आस टूटने की
न हो भ्रष्टाचार की कोई बात
न आग, न फाँसी
न जहरखुरानी की खबर हो
चले नहीं हों चाकू और छुरे
ND
न चैन छीना हो किसी का
न चेन लूटी हो
बस खबर हो तो फूलों की
मुस्कुराते बच्चों की
मुराद पूरी होने की खबर हो
काश, कोई दिन ऐसा भी आ जाए
जब सारा अखबार ही
सकारात्मक नजर आए।
