कोई दिन ऐसा भी आए
-डॉ. संजीव नाईक
काश, कोई दिनऐसा भी आ जाएअखबार जब केवल खुशियाँ बरसाएन हो कोई खबर किसी अस्मत के लूटने कीन किसी सितारे के, असमय टूटने कीन ताल सूखने की खबर होन आस टूटने कीन हो भ्रष्टाचार की कोई बातन आग, न फाँसीन जहरखुरानी की खबर होचले नहीं हों चाकू और छुरे
और न किसी की गर्दन कटी होन चैन छीना हो किसी कान चेन लूटी होबस खबर हो तो फूलों कीमुस्कुराते बच्चों कीमुराद पूरी होने की खबर होकाश, कोई दिन ऐसा भी आ जाएजब सारा अखबार हीसकारात्मक नजर आए।