1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. काव्य-संसार
Written By स्मृति आदित्य

कहीं दूर चली जाऊँ

फाल्गुनी

फाल्गुनी
ND
मन करता है
कहीं दूर चली जाऊँ,
कभी नहीं आऊँ,
और फिर तुम
मुझे अपने आसपास ना पाकर,
परेशान हो जाओ,
मैं तुम्हें खूब याद आऊँ,
इतनी याद आऊँ कि
ढुलक पड़े तुम्हारी पत्थर जैसी
बेजान आँखों से बेतरह आँसू,
तुम्हारे कठोर दिल से
निकल पड़े ठंडी आहें,
और तुम दुआएँ माँगों
बार-बार
मेरे हक में कि
ऐ खुदा लौटा दे
मेरी उस सच्ची चाहने वाली को
पर मैं तब भी
नहीं मिलूँ तुम्हें,
फिर तुम्हें
अपनी हर बेवफाई
याद आए
एक-एक कर,
जिसे मैंने जिया है
हर रोज मरकर।
लेखक के बारे में
स्मृति आदित्य