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Written By WD

उसे दुआ देनी पड़ती है

काव्य-संसार

काव्यसंसार
देवमणि पांडे
ND
इक चेहरे को ढूँढ रहा हूँ बरसों से अनजानों में
अपनी भी गिनती होती है यारो अब दीवानों में

मुझपर यूँ ही हँसने वाले काश कभी यह भी सोचें
चैन मयस्सर हो जाता तो क्यों जाते मयखानों में

उसे दुआ देनी पड़ती है, जिसने दिल को तोड़ा है
कुछ मजबूरी भी होती है चाहत के अफसानों में

तुमने ही तो दिल में हमारे फूल खिलाए जख़्मों के
नाम तुम्हारा शामिल कर लें हम कैसे बेगानों में

दिल के जख़्म हुए गहरे तो हमको यह महसूस हुआ
कितने काँटे छुपे हुए थे कलियों सी मुस्कानों में।
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WD