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आप आए मेरी महफिल में
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राजीव राय अगर दौलत ही बचा लेती ज़िंदगी कोईन होता खौफ़ ख़ुदा का न बंदगी कोईग़मों को बाँटता फिरता है तू ज़माने मेंमिलेगी कैसे भला तुझको दोस्ती कोई किसी पंछी की तरह मैं भी अगर उड़ सकताकोई बंदिश नहीं होती न बेबसी कोईआप आए मेरी महफिल में ऐसा लगता है अँधेरी बज़्म में आई हो रोशनी कोईमंज़िलें भी उसी राही की राह तकती हैंग़मों की भीड़ में ढूँढ़ेगा जो खुशी कोई । साभार : प्रयास