Poems in Hindi | आओ, हम फिर से जिएं
अजित कुमार
WD
बहता-बहता मेघखंड जो
पहुंच गया है वहां क्षितिज तक...
लौटा लाएं उसे,
कहें :
'ओ, फिर से बहो!
मंद, मंथर, मृदु गति से...
शोभावाही मेघ, रसीले मेघ, दूत!
जो कथा कही थी, फिर से कहो!'
और...
अपलक, अविचल
हम उसे निरखते रहें, सुनें!
आओ, हम फिर से जिएं!
