suvichar
✕

25 जून, आपातकाल दिवस पर कविता : वो काले दिन

Updated: सोमवार, 25 जून 2018 (11:18 IST)
- शशींद्र जलधारी
 
25 जून उन्नीस सौ पचहत्तर,
जब ग्रहण लगा लोकतंत्र के सूरज पर। 
छा गया आपातकाल का अंधियारा,
कतर दिए मौलिक अधिकारों के पर।।
 
था वो जुल्मो-सितम का दौर
नहीं पता था होगी भोर,
ठूंस-ठूंस कर भर दी जेलें
रौंद डाला कानून चहुंओर।।
 
वो बन बैठी थी तानाशाह 
केवल सत्ता की खातिर,
कहने को तो थी वो नारी
पर थी वो दिल से अति शातिर।।
 
पूरा देश ही बना दिया था
एक किस्म का बंदीगृह,
न अपील थी न दलील थी
न सुना जा रहा था अनुग्रह।।
 
हमें न कहो तुम मीसाबंदी
हम हैं लोकतंत्र के प्रहरी,
आजादी की रक्षा के हित
जान भी दे देंगे हम अपनी।।
 
स्वतंत्र भारत के इतिहास का 
था वो एक काला अध्याय,
जिसकी हर पंक्ति में लिखा
था मनमानी और अन्याय।।
 
दोबारा वो काले दिन
अब हम नहीं लौटने देंगे,
तोड़ देंगे उन हाथों को
जो जनतंत्र का गला घोंटेंगे
 
प्रजातंत्र के रक्षक हैं हम
लेते आज सब मिलकर प्रण,
सहन नहीं करेंगे हम अब
भारत मां पर कोई आक्रमण।।
 
तानाशाही की मुखालिफत
को नाम दिया था देशद्रोह,
अगर यही सच है तो फिर
हम करेंगे बार-बार विद्रोह।।
 
(सन् 1975 में आपातकाल के दौरान लेखक तीन महीने इंदौर की जेल में निरुद्ध रहे।)

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

वरिष्ठ अधिकारी चक्रपाणि दत्त मिश्र की पुस्तक 'कमेंट्री ऑन इंडियन स्टाम्प एक्ट, 1899' का गौरवमयी विमोचन

फेमिनिस्‍ट औरतों को एक तख़्ती पर मर्दों के लिए यह भी लिखना चाहिए

रानी दुर्गावती जयंती 2026: स्वाभिमान के लिए सीने में घोंप ली थी कटार, जानें गोंडवाना की महान महारानी के अमर बलिदान की कहानी

कब मनाई जाती है गुरु नानक देव की पुण्यतिथि? जानें उनके प्रेरणादायी प्रसंग और अनमोल विचार

HPV वाले कैंसर से बचाने में कितना कारगर है टीका?

अगला लेख