वर्तमान परिस्थितियों पर कविता: करना होगा थोड़ा इंतजार !

karna hoga thoda intzar

नहीं है ठीक अभी
करना होगा थोड़ा इंतजार
होने के लिए खुश या फिर
दिखने के लिए उदास
चुनना होगा कोई और वक्त
इस एक जरूरी काम के लिए !

समझाना होगा और भी लोगों को
मसलन, वह बच्चा जो जा रहा है
किसी पर
काम के लिए, बांधें टिफिन
कद से ऊंची साइकिल पर
या फिर खड़ा है जो उदास-सा चौराहे पर
भींचे हुए मुट्ठियां अपनी
दिहाड़ी मिलने के में
या वह जो बेच रहा है सब्जियां और फल
बदल कर नाम अपना बड़े मोहल्लों में !
समझाना होगा इन सब लोगों को-
बना रहे हैं लिस्टें पार्टी के लोग
रखे हुए हैं नजरें उन पर
मुस्कुरा नहीं रहे हैं जो बिलकुल भी
या खड़े हुए हैं चुपचाप कोनों में
कर रहे हैं बातें अपने आप से !
मान लिया जाएगा बे-मुरव्वत-
रच रहे हैं ये कोई संगीन साजिश
षड्यंत्रकारी हुकूमत के खिलाफ
उखाड़ फेंकना चाह रहे हैं सरकार को !
ठीक नहीं है मौसम अभी
करना होगा इंतजार किसी और वक्त का
मर्जी से होने के लिए !
हम सबका भी
हो गए हैं भी अब उत्तरायण
खबर तो बसंत के आगमन की भी है
देखना ! बदलने वाला है अब बहुत कुछ !
लौटने वाली हैं खुशियां
नहीं होना पड़ेगा ज्यादा उदास !
बस करना होगा थोड़ा इंतजार !



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