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हिन्दी कविता : शान्ति और विकास का मंगलाचरण

Updated: रविवार, 24 सितम्बर 2017 (13:49 IST)
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
 
रंग लाई है दोस्ती (दो विश्वशक्तियों) भारत की और जापान की।
साकार होने लगीं कल्पनाएं, हमारे अरमानों की, उड़ान की।। 
बुलेट ट्रेन तो प्रतीक है, हमारे दूरगामी सपनों की,
वह तो मंगलाचरण है, तीव्रतम  आर्थिक प्रगति के हमारे अभियान की ।। 1 ।।
 
आतंक निरोधी सफल कार्यवाहियों से कश्मीर में शान्ति के अंकुर फूटने लगे।
उधर वित्तीय सुधारों से काले कारोबारियों के भ्रमजाल टूटने लगे ।।
शान्ति और विकास की सामानान्तर बयार बहने लगी ज्यों ज्यों भारत में ,
चीन -पाक के षड्यन्त्रकारी मंसूबों को हताशा के पसीने छूटने लगे ।। 2 ।।
 
सैल्यूट भारतीय सेना को ( उकसाने के बावजूद ) संयम / धीरजपूर्ण डोकलाम के लिये।
सैल्यूट पुनः पुनः, पाक सीमा से सटे कुशल आतंकरोधी संग्राम के लिये ।।
सैल्यूट प्राकृतिक आपदाओं में जन रक्षा के व्यापक सेवाभावी पैगाम के लिये।
सैल्यूट, संसार भर में स्थापित कुशल, समर्पित 'भारतीय सैन्य सेवा ' के नाम के लिये ।। 3 ।।
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्‍यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय.... और पढ़ें

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