Hanuman Chalisa
✕

हिन्दी कविता : तुम ऐसी तो न थीं...

Updated: बुधवार, 17 मई 2017 (14:47 IST)
कविता तुम ऐसी तो न थीं
उत्ताल तरंगित तुम्हारी हंसी
लगता था जैसे झरना
निर्झर निर्भय बहता हो।
 
शब्दों के संप्रेषण इतने
कुंद तो न थे स्थिर सतही
तुम्हारे शब्द फिजाओं में तैरकर
सीधे हृदय में अंकित होते थे।
 
तुम पास होती थी तो गुलाब की खुशबू तैरती थी वातावरण में
अचानक सब शून्य कैसे हो गया
क्यों मूक-बधिर-सी तुम एकाकी हो
क्यों मन से भाव झरना बंद हो गए।
 
क्यों स्थिर किंकर्तव्यविमूढ़-सी
तुम बहती रहती हो
कविता और नदी कभी अपना स्वभाव नहीं बदलती
नदी बहती है कल-कल सबके लिए।
 
कविता स्वच्छंद विचरती है सबके मन में
उल्लसित भाव लिए सबको खुश करती
कविता तुम मूक मत बनो
कुछ कहो, कुछ सुनो।
 
उतरो सबके दिलों में निर्मल जल धार बन
मत बदलो अपने स्वभाव को
कविता तुम ऐसी तो न थी।
लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

वाणी साहित्य उत्सव का आगाज, पहले दिन युद्ध, स्त्री विमर्श और एआई के दौर में लेखन पर हुआ मंथन

वर्ल्ड स्ट्रोक डे: स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही लें चिकित्सकीय सहायता, हर मिनट है कीमती

बौखलाए नेताओं की बेरहमी का ये सबसे निर्दयी उदाहरण है, 200 पेड़ों से हजारों परिंदों के आशियाने उजाड़कर मेट्रो चलाएंगे

करवा चौथ से पहले चेहरे पर कैसे लाएं नेचुरल ग्लो? घर पर अपनाएं ये आसान ब्यूटी टिप्स

विजय सिंह चौहान की आठ लघुकथाएं

अगला लेख