जानिए हिन्दी सेवी विदेशी विद्वान

ऋषि गौतम विदेशी पहचान, हिन्दी जुबान> > अपने ही देश में भाषाओं के नाम के पर आज भी हम लड़ते हैं। लेकिन विदेशी मूल के ऐसे कई ऐसे लोग हुए हैं जिन्हें इंडोलॉजिस्ट या भारतीय विद्याविद् कहा जाता है उन्होंने भारतीय भाषा,समाज और संस्कृति को न सिर्फ अपने नजरिये से देखा-परखा बल्कि उसी के होकर रह गए।
 
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विदेशी विद्वानों के भारत से प्रभावित होने की लंबी परंपरा रही है। यहां आने के बाद अधिकांश ने न सिर्फ भारत की संस्कृति और धर्म से खुद को जोड़ लिया,बल्कि ई ने अलग-अलग भाषाएं सीख कर उन भाषाओं की सेवा के लिए खुद को समर्पित कर दिया। हिन्दी दिवस के मौके पर आज जानें कुछ ऐसे ही लोगों के बारे में जिनका जन्म भले विदेश में हुआ लेकिन आजीवन वे हिन्दी के सेवा में लगे रहे......

अगले पेज पर : फादर कामिल बुल्के




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