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अब मगरमच्छ करेंगे सीमा की रखवाली! घुसपैठ रोकने के लिए सरकार का मास्टर प्लान

Updated: मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 (17:21 IST)
India-Bangladesh border security: भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक नया सुझाव दिया है। सीमा के वे इलाके जहां नदियों और दलदल के कारण कंटीली बाड़ लगाना मुश्किल है, वहां प्राकृतिक अवरोध के रूप में मगरमच्छों और जहरीले सांपों का उपयोग किया जा सकता है या नहीं, इस पर BSF (सीमा सुरक्षा बल) द्वारा विशेष अध्ययन शुरू किया गया है। यदि यह योजना सफल रहती है, तो सीमा सुरक्षा में जीवों का योगदान एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा।

सीमा की भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक अवरोध की आवश्यकता

भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग 175 किमी का सीमावर्ती क्षेत्र नदियों और दलदली भूमि वाला है, जिसमें इच्छामती, रायमंगल और हरिभंगा जैसी नदियां शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बार-बार आने वाली बाढ़ और भौगोलिक विषमताओं के कारण स्थायी बाड़ बनाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। इसलिए, इन जलमग्न क्षेत्रों में मगरमच्छों जैसे हिंसक सरीसृपों को छोड़ने से घुसपैठियों में डर पैदा होगा और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सकेगी।

सोशल मीडिया पर गुजरात और बंगाल के बीच रोचक चर्चा

इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर जबरदस्त बहस छिड़ गई है। वडोदरा के यूजर्स गर्व से कह रहे हैं कि 'संस्कारी नगरी' के मगरमच्छ देश की रक्षा के लिए हमेशा तैयार हैं। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल के यूजर्स ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुंदरवन पहले से ही दुनिया के सबसे बड़े सरीसृपों का घर है, इसलिए उन्हें गुजरात से मगरमच्छ मंगाने की जरूरत नहीं है। ये प्राकृतिक 'इकोलॉजिकल क्लीनर्स' घुसपैठ रोकने के लिए सबसे अच्छा विकल्प साबित हो सकते हैं।

मगरमच्छों की नगरी के रूप में वडोदरा की पहचान

गुजरात का वडोदरा शहर अपने मगरमच्छों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। शहर के बीच से गुजरने वाली विश्वामित्री नदी मगरमच्छों का प्राकृतिक आश्रय स्थल है। पूर्व में आई बाढ़ के दौरान मगरमच्छ रिहायशी इलाकों और घरों की छतों पर भी देखे गए थे। पावागढ़ से निकलकर खंभात की खाड़ी में मिलने वाली इस नदी में मगरमच्छों की संख्या और उनका प्रजनन प्राकृतिक रूप से बहुत बड़े पैमाने पर होता है।

वडोदरा में मगरमच्छों की नवीनतम गणना

वडोदरा नगर निगम के आयुक्त अरुण महेश बाबू (IAS) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, फरवरी 2026 में की गई नवीनतम जनगणना के अनुसार वडोदरा में मगरमच्छों की कुल संख्या 417 दर्ज की गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि शहरी क्षेत्र होने के बावजूद यहां मगरमच्छ सुरक्षित रूप से रह रहे हैं। BSF की स्टडी रिपोर्ट के बाद यदि मगरमच्छों को सीमा पर भेजने का निर्णय लिया जाता है, तो वडोदरा के मगरमच्छों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
 
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