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LPG संकट का तोड़, गुजरात बनास डेयरी के प्लांट में रोज बनता है 1800 KG बायोगैस, 15 राज्य अपनाएंगे यह मॉडल

Updated: गुरुवार, 26 मार्च 2026 (18:47 IST)
Gujarat Banas BIO CNG Model: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों ने पूरी दुनिया को गहरे ऊर्जा संकट की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। इस तनावपूर्ण स्थिति में 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग चर्चा का केंद्र बन गए हैं, जिससे पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों पर निर्भरता कम करना अब समय की मांग बन गई है। ऐसे में गुजरात के 'बनास बायो-सीएनजी' मॉडल की सफलता की कहानी एक नई उम्मीद जगाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "वेस्ट टू वेल्थ" (कचरे से कंचन) के विजन को जमीन पर उतारने वाला यह प्रोजेक्ट भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का नया उदाहरण

मिडिल ईस्ट के युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच गुजरात का 'बनास बायो-सीएनजी' मॉडल पूरे देश के लिए आशा की किरण बनकर उभरा है। बनास डेयरी द्वारा विकसित यह प्रोजेक्ट गाय के गोबर जैसे पारंपरिक कचरे को स्वच्छ ईंधन (Green Energy) में परिवर्तित कर रहा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में इस सफल मॉडल को अब देश के अन्य 15 राज्यों में भी लागू करने की तैयारी चल रही है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।

और 10 नए प्लांट की योजना

बायो-सीएनजी क्षेत्र की क्षमता को देखते हुए गुजरात सरकार ने बजट में 60 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है। इस आर्थिक सहायता का मुख्य उद्देश्य सहकारी दूध उत्पादक संघों के माध्यम से राज्य में चरणबद्ध तरीके से 10 नए बायो-सीएनजी प्लांट स्थापित करना है। बनासकांठा में पिछले छह वर्षों से कार्यरत प्लांट की सफलता के बाद, अब वहां पांच अन्य बड़े प्लांट पर काम चल रहा है, जिनमें से दो चालू हो चुके हैं। इस पहल से किसानों, पर्यावरण और उद्योग तीनों को बड़ा लाभ होगा।

पशुपालकों की आय में वृद्धि

यह प्रोजेक्ट न केवल ऊर्जा प्रदान कर रहा है, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका का साधन भी बन गया है। प्लांट के 20-25 किमी के दायरे में आने वाले लगभग 400-450 पशुपालक परिवारों से 1 रुपए प्रति किलो की दर से गोबर खरीदा जाता है, जो उन्हें अतिरिक्त आय प्रदान करता है। इसके अलावा, गोबर के परिवहन के लिए 13 ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग किया जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है। इस प्रकार, यह मॉडल पारिस्थितिकी (Ecology) और अर्थव्यवस्था (Economy) का उत्तम समन्वय पेश करता है।

रोज 1800 किलो गैस का उत्पादन

बनासकांठा का यह आधुनिक प्लांट हर दिन लगभग 100 मीट्रिक टन गोबर की प्रोसेसिंग करके 1800 किलोग्राम कंप्रेस्ड बायोगैस (CNG) पैदा करता है, जो बाजार में 75 रुपये प्रति किलो के भाव से बिकती है। गैस के साथ-साथ यहाँ से प्रतिदिन 25 मीट्रिक टन ठोस और 75 मीट्रिक टन तरल जैविक खाद भी प्राप्त होती है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से वार्षिक लगभग 6,750 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जो 'ग्रीन गुजरात' के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
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