एक्‍शन मोड में सरकार, क्‍या Youtubers पर सख्त हो रही है सरकार? जानें क्‍या कहता है साइबर लॉ, यूट्यूब की कम्युनिटी गाइडलाइन

Last Updated: गुरुवार, 3 फ़रवरी 2022 (12:37 IST)
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फिलहाल दुनिया में दो ही तरह के क्षेत्र है जहां लोगों को यूजर्स कहा जाता है। पहला जो ड्रग्स का सेवन करते हैं और दूसरे सोशल मीडिया का प्रयोग करने वाले लोगों को यूजर्स कहा जाता है। आज दुनियाभर में सोशल मीडिया के माध्‍यम से लोग करोड़ों रुपए कमा रहे हैं। बल्कि इसे एक सोशल मीडिया युग के नाम से पहचान मिलने लगी है। फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम सहित अन्‍य प्लेटफॉर्म अपनी बहुत अच्छी पहचान बना चुके हैं। लेकिन जिस तरह से इन प्‍लेटफॉर्म का आकार बढ़ता जा रहा है यह कई लोगों के लिए मुसीबत भी खड़ी कर रहे हैं।

कई अहम मुद्दों पर इस तकनीक की वजह से दुनिया एक साथ खड़ी हो सकी लेकिन अराजक लोगों के माध्यम से सोशल मीडिया पर भड़काऊ कंटेंट से देश की अखंडता पर चोट मारी जा रही है। देश में सोशल मीडिया के माध्‍यम से दंगे भड़काना आम बात हो रही है। असम हिंसा, दिल्‍ली हिंसा, बैंगलोर में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करने से 3 घंटे के अंदर हिंसा भड़क उठी थी।

हाल ही में बिहार और महाराष्‍ट्र में हुए दंगों से समझा जा सकता है किस तरह सोशल मीडिया के माध्यम से आग लगाई जा रही है। बिहार मेंRRB-NTPC परीक्षा के रिजल्ट में गड़बड़ी को लेकर छात्रों में रोष देखा गया। सार्वजनिक संपत्ति को जलाकर विरोध प्रदर्शन दर्ज किया गया। मामला गर्मा गया और मशहूर खान सर पर प्राथमिकी दर्ज की गई।

ऐसा ही महाराष्‍ट्र में हुआ-
महाराष्‍ट्र में 10वीं और 12वीं के छात्रों द्वारा ऑफलाइन एग्जाम के विरोध में उग्र प्रदर्शन किया गया। जिसमें विकास फाटक उर्फ हिंदुस्तानी भाऊ को गिरफ्तार किया गया। नागपुर में छात्रों द्वारा बस में तोड़ फोड़ की गई। ऑनलाइन परीक्षा रद्द करने की मांग की गई।

एक्‍शन मोड में सरकार -
देश में हिंसा भड़काना तकनीकी माध्‍यम से बहुत हद तक आसान हो गया है। अक्सर एजेंसियों को हिंसा होने के बाद पता चलता है। ऐसे में सरकार ने इस मामले में साल 2021 में अहम फैसले लिए है। डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म को लेकर सरकार सख्त हो रही है। केंद्र सरकार ने आपत्तिजनक कंटेंट और अकाउंट पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है। साल 2021 में केंद्र सरकार इंडियन इंफॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी नियम 2021 जिसके तहत तमाम मीडियम को कैटिगराइज किया गया।



गाइडलाइन में शामिल ये 4 तरह के प्‍लेटफॉर्म -

पहला - इंटरमीडिएरीज।
दूसरा - सोशल मीडिया इंटरमीडिएरीज।
तीसरा - सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडिएरीज।
चौथा - OTT प्लेटफॉर्म

जानिए क्‍या है -
यूट्यूब इंटरमीडियरीज एक सर्विस है, जो यूट्यूबर्स के कंटेंट को ट्रांसमिट और पब्लिश करता है। ये इंटरमीडियरीज इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर भी हो सकते हैं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी हो सकते हैं। या फिर ऐसा वेब सर्विस जो आपको कंटेंट अपलोड करने, पोस्‍ट करने और पब्लिश करने की मंजूरी देते हैं।

यू ट्यूब के कम्‍यूनिटी दिशा-निर्देशों का पालन -
बता दें कि आज के वक्त में You Tube पैसा कमाने का बहुत बड़ा जरिया बन गया है। इस अनुसार हर वक्त पॉलिसी और कम्‍युनिटी दिशा - निर्देशों में भी बदलाव होता रहा है। You Tube से कमाई करने वाले क्रिएटर्स को दिशा-निर्देशों का पालन सिर्फ वीडियो में ही नहीं बल्कि पूरे चैनल पर भी लागू होता है।

- स्पैम, गुमराह करने वाली गतिविधियां और धोखाधड़ी
- नग्नता और सेक्‍सुअल कॉन्‍टेंट
- बच्‍चों की सुरक्षा
- नुकसान पहुंचाने वाला या खतरनाक कॉन्‍टेंट
- नफरत फैलने वाली भाषा
- उत्पीड़न और इंटरनेट पर धमकाना

इन सभी मुख्य बिंदुओं को ध्यान में रखना जरूरी होता है। कॉन्‍टेंट दिशा-निर्देशों के मुताबिक नहीं होने पर नोटिस भेजा जाता है। बार-बार उल्लंघन करने पर कार्रवाई के बदले या तो वीडियो को ही हटा दिया जाता है या चैनल ही हटा दिया जाता है। इसके बाद यह मायने नहीं रखता है कि आपके कितने सब्सक्राइबर रहे।

अप्रैल 2021 - जून 2021 में You Tube से हटाए गए वीडियो



Image : Official Website Youtube

भारत के इन राज्यों में बढ़े साइबर अपराध
2011 से 2015 तक इन राज्यों में बढ़ा सबसे अधिक क्राइम

- महाराष्‍ट्र शीर्ष पर।
- उत्तर प्रदेश दूसरे पायदान पर।
- कर्नाटक तीसरे पायदान पर।


स्‍त्रोत - www.faclty.in.com


भारत में पर कानून -
आतंकी गतिविधियों को प्रोत्साहन की जानकारी (यूएपीए की धारा 12), हिंसा को प्रोत्साहन (IPC की धारा 505), साइबर अपराध (IPC धारा 364 D, 354 C, 507), आत्महत्या को प्रोत्साहन (IPC धारा 306, 309), अफवाहों का प्रसार (IPC धारा 505) के तहत कार्रवाई की जाती है।



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