1 नवंबर को देश में 6 राज्यों का हुआ था पुनर्गठन, साल 1956 से 2000 तक चला सिलसिला

Last Updated: सोमवार, 1 नवंबर 2021 (12:24 IST)
हमें फॉलो करें
1 नवंबर इस तारीख का भारत के इतिहास में बहुत महत्व है। सालों पहले देश में विभिन्‍न राज्‍यों को भाषा आधार पर पुनर्गठन करने का फैसला लिया था। 1 नवंबर को देश के 6 अलग-अलग राज्यों का जन्‍म हुआ था। यह सिलसिला 1956 से लेकर 2000 तक चला। 1 नवंबर को मध्य प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, छत्तीसगढ़, पंजाब और केरल विस्थापित
हुए थे। 1 नवंबर को 6 राज्य अपना स्‍थापना दिवस मनाते हैं। इसी के साथ
1956 में 1 नवंबर को दिल्ली को भी केंद्र शासित प्रदेश के रूप में पहचान मिली थी।
इन छह राज्यों के स्‍थापना दिवस के उपलक्ष्य में जानते हैं उन्हें संक्षिप्त से-


मध्य प्रदेश- मप्र देश के बीच में स्थित है, जिसे देश का दिल कहा जाता है। पूर्व में मध्‍य प्रदेश का नाम मध्‍य भारत था। जिसे बाद में परिवर्तित किया गया। 1 नवंबर 2021 को
मप्र अपना 66 वां स्‍थापना दिवस मना रहा है। मध्य प्रदेश की स्‍थापना 1 नवंबर 1956 को हुई थी। गौरतलब है कि मप्र को विभाजित करना बहुत चुनौतीपूर्ण था। ऐसा इसलिए
क्‍योंकि यह 4 प्रांतों में बंटा था। मध्य प्रांत, विंध्य प्रांत, पुराना मध्य प्रदेश और भोपाल को जोड़कर एक राज्‍य बनाना। आखिर में 1 नवंबर, 1956 को मप्र की स्‍थापना की गई।
मुख्यमंत्री के तौर पर पं. रविशंकर शुक्‍ल ने लाल परेड ग्राउंड पर अपना पहला भाषण दिया था।

पंजाब और हरियाणा - पंजाब भारत के उत्‍तर पश्चिम राज्य में है। इसके पश्चिम में पाकिस्तान, उत्‍तर में जम्‍मू और कश्‍मीर, उत्तर पूर्व में हिमाचल और दक्षिण में हरियाणा और

राजस्थान की सीमा है। पंजाब को पांच नदियों की भूमि भी कहा जाता है। क्‍योंकि यहां पांच नदियां हैं - सतलुज नदी, रावी नदी, चिनाब नदी, झेलम नदी, और व्यास नदी। हालांकि
विभाजन के बाद झेलम नदी पाकिस्तान में चली गई। पंजाब में अब सिर्फ चार नदियां बहती है। स्वतंत्रता के बाद राज्यों के पुनर्गठन पर फैसला किया जा रहा था। उस दौरान सिख
और हिंदुओं की बड़ी तादाद में संख्या एक साथ रहती थी। सिखों ने भाषा के आधार पर एक अलग राज्य की मांग की। हालांकि 1950 में यह मांग नहीं मानी गई। आंदोलन चलता
रहा। इसके बाद 1966 में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने मांगों को स्वीकार कर लिया गया और पंजाब का पुनर्गठन किया गया। साथ ही जहां हरियाणवी बोली बोली जाती थी वह दक्षिण भाग अलग कर दिया। हरियाणा का एक अलग राज्य बन गया।

छत्तीसगढ़ - छत्तीसगढ़ और मध्‍य प्रदेश आजादी के लंबे अरसे बाद अलग हुए है। छत्तीसगढ़ को एक राज्य का दर्जा 1 नवंबर 2000 को मिला था। आज छत्तीसगढ़ का 21वीं
स्‍थापना दिवस है। हालांकि अन्‍य राज्‍यों की तुलना में मप्र का गठन भाषा के आधार पर नहीं हुआ था। लेकिन स्वतंत्रता के पूर्व से ही छत्‍तीसढ़ को अलग राज्‍य बनाने की मांग की जा
रही थी। लेकिन छत्तीसगढ़ी और गोंड की भाषा का प्रचलन अधिक बढ़ गया था इसके बाद 1 नवंबर 2000 को पुनर्गठन की स्‍थापना हुई और अमित जोगी इसके पहले मुख्यमंत्री
बनें।


केरल - यह राज्‍य प्राचीन समय से विज्ञान, व्यापारिक संबंध और कला से समृद्ध रहा। यह राज्‍य आज भी देश में महत्‍वपूर्ण स्‍थान रखता है। कला और संस्कृति की बात की जाए तो यह आज भी महत्‍वपूर्ण स्‍थान रखता है। स्वतंत्रता के बाद केरल राज्‍य का भी पुनर्गठन किया गया। राज्‍य पुनर्गठन एक्ट 1956 के तहत केरल राज्य का निर्माण मद्रास राज्य के
मालाबार जिले सहित अन्‍य राज्‍य और जिले को मिलाकर किया गया है। 1 नवंबर को केरल की स्‍थापना की गई। कुछ लोग इसे मलयालम दिवस भी बोलते हैं। प्रमुख रूप से इस
दिवस को केरालाप्पिरवी के नाम से मनाते हैं।


कर्नाटक - कर्नाटक कई बड़े शक्तिशाली साम्राज्य और युद्ध का क्षेत्र रहा है। इस क्षेत्र की खोज हड़प्‍पा में स्‍वर्ण कर्नाटक की खानों से निकला था। एक वक्‍त था जब कर्नाटक 20 से भी अलग राज्यों में बंटा था। 19वीं शताब्दी में कर्नाटक को एकीकरण करने की मांग उठी। इस बीच कई झड़प हुई और 1 नवंबर 1956 को भाषा के आधार पर स्‍टेट ऑफ मैसूर के नाम से स्‍थापना की। साल 1973 में स्‍टेट ऑफ मैसूर से नाम बदलकर कर्नाटक रखा गया था। उस वक्त देश के मुख्यमंत्री देवराज उर्स थे।



और भी पढ़ें :