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कामनापूर्ति के लिए कौनसे पार्थिव श्रीगणेश का करें पूजन, आप भी जानिए...

Updated: मंगलवार, 4 सितम्बर 2018 (13:20 IST)
अलग-अलग कामनाओं की पूर्ति के लिए अलग-अलग द्रव्यों से बने हुए गणपति की स्थापना की जाती है।
 
(1) श्री गणेश : मिट्टी के पार्थिव श्री गणेश बनाकर पूजन करने से सर्व कार्यसिद्धि होती है।
 
(2) हेरम्ब : गुड़ के गणेशजी बनाकर पूजन करने से लक्ष्मी प्राप्ति होती है।
 
(3) वाक्पति : भोजपत्र पर केसर से श्री गणेश प्रतिमा (चित्र) बनाकर पूजन करने से विद्या प्राप्ति होती है।
 
(4) उच्चिष्ठ गणेश : लाख के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से स्त्री सुख और स्त्री को पति सुख प्राप्त होता है, गृह क्लेश का निवारण होता है।
 
 
(5) कलहप्रिय : नमक की डली या नमक के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से शत्रुओं में क्षोभ उत्‍पन्न होता है, वह आपस में ही झगड़ने लगते हैं।

(6) गोबर गणेश : गोबर के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से पशुधन में वृद्धि होती है और पशुओं की बीमारियां नष्ट होती हैं (गोबर केवल गौमाता का ही हो)।
 
(7) श्वेतार्क श्री गणेश : सफेद आक मन्दार की जड़ के श्री गणेशजी बनाकर पूजन करने से भूमि और भवन लाभ होता है।
 
(8) शत्रुंजय : कड़वे नीम की लकड़ी से गणेशजी बनाकर पूजन करने से शत्रुनाश होता है और युद्ध में विजय होती है।
 
(9) हरिद्रा गणेश : हल्दी की जड़ से या आटे में हल्दी मिलाकर श्री गणेश प्रतिमा बनाकर पूजन करने से विवाह में आने वाली हर बाधा नष्ट होती है और स्तंभन होता है।

(10) संतान गणेश : मक्खन के श्री गणेशजी बनाकर पूजन से संतान प्राप्ति के योग निर्मित होते हैं।
 
(11) धान्य गणेश : सप्तधान्य को पिसकर उसके श्री गणेशजी बनाकर आराधना करने से धान्यवृद्धि होती है, अन्नपूर्णा मां प्रसन्न होती हैं।

(12) महागणेश : लाल चंदन की लकड़ी से दशभुजा वाले श्री गणेशजी की प्रतिमा निर्माण कर पूजन करने से राजराजेश्वरी श्री आद्याकालीका की शरणागति प्राप्त होती है।
 
जय गणेश, काटो क्लेश।

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लेखक के बारे में
आचार्य संतोष शर्मा
मेहंदीपुर बालाजी (राज.).... और पढ़ें

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