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Written By ND

अनिल सरकार के पाँच विचार

अनिल अंबानी सरकार
- देवेंद्र

Devendra SharmaND
अनिल अंबानी जब इंदौर से उज्जैन के लिए खुद कार ड्राइव करते चल पड़े, तब उन्हें सड़क के झटकों के बीच रह-रहकर कई तरह के ख्याल आए।

* साँवेर रोड पर पहला विचार :-
इस रास्ते पर उद्योगों से ज्यादा तो मंदिर हैं ! तो मंदिरों का धंधा ही क्या बुरा है? बिड़ला द्वारा बनवाए गए लक्ष्मीनारायण के मंदिर जिस तरह 'बिड़ला मंदिर' के नाम से मशहूर हैं, ठीक उसी तरह लक्ष्मीदेवी के 'रिलायंस मंदिर' भी हो सकते हैं। दानपेटी में दक्षिणा पहुँचाने के बाद उसमें लगी मशीन के विविध बटन दबाने पर खोपरा बूरा, बरफी, केला या पंचामृत प्रसाद के रूप में पाया जा सकेगा। मंदिर में निवेश करके चढ़ावा, आरती और दानपेटी से लाभ प्राप्त करने का कंसेप्ट भी बुरा नहीं।

* साँवेर आने पर दूसरा विचार : -
ये गाँववाले कैसे चैन से बैठे, शांति से ककड़ी, भुट्‍टे और अमरूद बेच रहे हैं। क्यों न इनकी जगह मैं ले लूँ? क्यों न उधर दूर, मनोयोग से खेत जोतते किसान को वहाँ से हाँककर उसके खेत में अपनी फैक्ट्री बो दूँ?

* रास्ते में पीली गाडि़याँ देखकर तीसरा विचार :-
इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र के मशहूर ब्रदर्स की बसों, ट्रकों, ट्रॉलों, क्रेनों से, इंदौर-उज्जैन रोड किस कदर आबाद है। काश इसी तरह अंबानी ब्रदर्स की हरी बसें भी 'इंदौर-इंदौर-इंदौर' और 'उज्जैन-उज्जैन-उज्जैन' के उद्‍घोष के साथ चहलकदमी करतीं। मगर हाय! ब्रदर मुकेश से पटरी बैठे तब ना।

* उज्जैन प्रवेश पर चौथा विचार :-
अगर उज्जैन के सिंहस्थ में निवेश किया जाए तो? सीढि़यों पर नहाते लोगों के लिए किनारे पर ही शिप्रा जल बरसाते शॉवरों वाले बाथरूम बनवाए जा सकते हैं। शुल्क चुकाओ, शिप्रा नहाओ। डुबकी की जिद करने वालों के लिए 'प्रति रिलायंस डुबकी' मोटी फीस। आहाहा !

* महाकाल पहुँचकर पाँचवाँ विचार :
सिंहस्थ के मौके पर उज्जैन में ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन हो सकता है। कितना मजा आएगा! सिंहस्थ में साधु-संतों के कम, उद्योगपतियों के शिविर, टेंट, तंबू बढ़-चढ़कर लगेंगे। मगर हाँ.... इस बात पर विवाद हो सकता है कि पहला स्नान कौन करें? लक्ष्मी मित्तल? बिल गेट्‍स? या मुकेश? या खुद मैं?

ट्‍न-ट्‍न तभी घंटी-घडि़याल की तेज आवाज से उनकी विचार श्रंखला टूट गई। देखा तो पाया कि विकास के मतवाले कुछ उत्साही लोग भक्तिभाव से उन्हीं की आरती उतार रहे हैं। ---

' जय अनिल देवा....!
ऐसा करो निवेश
कि खाए मध्यप्रदेश मेवा....!!'
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ND