‘भारत बंद’ एक घिसीपिटी अवधारणा है, यह काम आपके एक ट्वीट से भी हो सकता है
- इंटरनेट के युग में आपका एक ट्वीट ज्यादा बडा आंदोलन खड़ा कर सकता है
- दुनिया के किसी भी कोने से किया गया एक ट्वीट चिंगारी बन सकता है
- सोशल मीडिया आज विरोध दर्ज करने का सबसे बड़ा साधन है
भारत बंद एक बहुत बड़ा शब्द है, सुनने में लगता है कि गलियों में मौन पसर जाएगा, सरकार के कान पर जूं रेगेंगी और देश में क्रांति आ जाएगी, लेकिन हकीकत यह है कि आधुनिक दुनिया में बंद एक घिसीपिटी अवधारणा है, इस बंद में इंटरनेट की मदद से भारत और भी तेज गति से चलता है। खैर, आप चाहो तो आपके विरोध का यह काम एक छोटे से ट्वीट से भी हो सकता है।
ऐसे आंदोलनों के परिणाम भी आए और अंग्रेज शासन को भारत से खदेडने में मदद भी मिली। लेकिन आज के दौर में आंदोलन या खासतौर से भारत बंद जैसी अवधारणा कितनी कारगर या प्रासंगिक है यह जानना बेहद जरूरी है। 8 दिसंबर को सरकार द्वारा लाए गए किसान बिल के विरोध में देशभर के किसानों ने भारत बंद का आह्वान किया गया है। ऐसे में जानना जरूरी है कि आज के समय में यह कितना प्रभावी या प्रासंगिक है।
दुनिया जहां पूरी तरह से इंटरनेट से लेस हो चुकी है, आधुनिक भारत में भी इंटरनेट एक बड़ा माध्यम है। जिंदगी के तमाम काम-काज इसी के ईर्द-गिर्द घूमते नजर आते हैं।
ठीक इसी तरह कोरोना वायरस के कहर के बाद स्कूल-कॉलेज और ऑफिस का कल्चर पूरी तरह से बदल गया है। यानि स्कूल और कॉलेज की क्लासेस ऑनलाइन ली जा रही है। ज्यादातर कंपनियों ने अपने ऑफिस बंद कर के वर्क फ्रॉम होम का कॉन्सेप्ट चुन लिया है। ऐसे में आज किसी को ऑफिस जाने की जरूरत नहीं है।
यानि जिंदगी से जुड़ी तकरीबन हर चीज इंटरनेट के माध्यम से की जा रही है तो फिर भारत बंद जैसे आंदोलन कोई बहुत ज्यादा असर नहीं छोड सकते हैं। जैसा कि किसान अभी कर रहे हैं। ऐसे में इस तरह के आंदोलन निरर्थक ही साबित होंगे।
मुद्दा यह है कि आधुनिक दुनिया में फिर विरोध कैसे जताया जाए। कैसे सरकार तक अपनी बात रखी जाए या पहुंचाई जाए। ऐसे में सोशल मीडिया की भूमिका याद आती है। आपको याद होगा, कुछ ही समय पहले अमेरिका में जॉर्ज फ्लायड की हत्या के बाद वहां ब्लैक लाइव्स मैटर नाम से एक कैंपेन चला। यह अभियान पूरी तरह से फेसबुक और ट्विटर पर चलाया गया और इसका असर पूरी दुनिया में हुआ। इसके लिए किसी तरह से देश या शहर बंद करने या तोड़फोड़ करने की जरुरत नहीं पड़ी।
ठीक इसी तरह हाल ही में भारत में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत के बाद सोशल मीडिया में जमकर और कई दिनों तक हैशटैग और अभियान चलाए गए, जिसका असर दुनिया के कई हिस्सों में और मीडिया में हुआ।
(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। इसमें शामिल तथ्य तथा विचार/विश्लेषण 'वेबदुनिया' के नहीं हैं और 'वेबदुनिया' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)

