भोपाल के कुख्यात ईरानी डेरा गैंग के साम्राज्य को बड़ा झटका लगा है। 6 से ज्यादा खूंखार गिरोहों को रिमोट कंट्रोल से चलाने वाला मास्टरमाइंड आबिद अली उर्फ 'रहमान डकैत' आखिरकार सूरत क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गया है। 14 राज्यों में फैले इसके जुर्म के नेटवर्क ने पुलिस की नींद उड़ा रखी थी। यह गिरफ्तारी महज एक अपराधी की पकड़ नहीं है, बल्कि भारत के सबसे पुराने और संगठित अपराध सिंडिकेट्स में से एक पर करारी चोट है।
1. ईरानी डेरा गैंग क्या है और इसकी शुरुआत कैसे हुई?
भोपाल के अमन कॉलोनी के पास स्थित ईरानी डेरा इस गैंग का हेडक्वार्टर माना जाता है।
क्या है इतिहास: इसकी नींव 1970 के दशक में हशमत ईरानी ने रखी थी।
सिंडिकेट : हशमत ने करीब 70 परिवारों को संगठित किया। नियम सरल था—हर परिवार से लोग अपराध करेंगे और लूट का एक हिस्सा सरगना को देंगे। बदले में, सरगना उन्हें पुलिस से सुरक्षा और कानूनी मदद (वकील आदि) मुहैया कराएगा।
विरासत: 2006 में हशमत की मौत के बाद उसके बेटे राजू ईरानी (रहमान) ने कमान संभाली और इसे एक हाई-टेक क्राइम नेटवर्क में बदल दिया।
2. 'कॉर्पोरेट' स्टाइल में काम करता था रहमान डकैत
रहमान खुद को एक डकैत कहता था, लेकिन उसका काम करने का तरीका किसी CEO जैसा था:
रिमोट कंट्रोल ऑपरेशन: वह खुद वारदातों में शामिल नहीं होता था। वह भोपाल में बैठकर रणनीति बनाता था कि कौन सी टीम किस राज्य में जाएगी।
6 सक्रिय गिरोह: उसके नीचे 6 अलग-अलग टीमें काम करती थीं, जो 14 राज्यों (MP, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, राजस्थान आदि) में सक्रिय थीं।
लग्जरी शौक: अपराध की कमाई से उसने घोड़ों का अस्तबल बनाया और महंगी गाड़ियों का काफिला रखा, ताकि इलाके में उसका रसूख बना रहे।
3. 'मोडस ऑपरेंडी': वे 4 तरीके जिनसे यह गैंग लोगों को ठगता था
ईरानी गैंग की खासियत उनकी भेष बदलने की कला थी।
जुर्म करने के 5 अनोखे और खतरनाक तरीके, यह गैंग केवल ताकत ही नहीं, बल्कि शातिर दिमाग का भी इस्तेमाल करता था:
फर्जी पुलिस/CBI: असली वर्दी पहनकर घरों में रेड डालना और जेवर समेट लेना।
नकली बैरिकेडिंग: सड़कों पर पुलिस बनकर चेकिंग के नाम पर गाड़ियों को लूटना।
बुजुर्गों को निशाना: अकेले रहने वाले वृद्धों के घरों में घुसकर डकैती करना।
साधु का भेष: तंत्र-मंत्र और 'गंदा फेंकने' (काला जादू) के बहाने ठगी करना।
4. हैवानियत की हद: जब मुखबिर को जिंदा जलाने की कोशिश की
रहमान डकैत सिर्फ शातिर ही नहीं, बल्कि बेहद क्रूर भी था। गैंग का खौफ बनाए रखने के लिए वह किसी भी हद तक जाता था। एक बार जब साबिर नाम के व्यक्ति ने पुलिस को जानकारी दी, तो रहमान और उसके भाई जाकिर ने उसे सरेआम जिंदा जलाने की कोशिश की। इसी तरह की हिंसक वारदातों के कारण उस पर MCOCA (मकोका) जैसे कड़े कानून लगाए गए थे।
5. गिरफ्तारी की इनसाइड स्टोरी: कैसे बिछाया गया जाल?
दिसंबर 2025 में भोपाल पुलिस ने जब डेरे पर 150 जवानों के साथ धावा बोला, तो रहमान चकमा देकर भाग निकला।
लोकेशन: वह महाराष्ट्र में छिपने के बाद गुजरात के सूरत पहुंचा।
इंटेलिजेंस: सूरत क्राइम ब्रांच को इनपुट मिला कि वह लालगेट इलाके में किसी बड़ी डकैती की प्लानिंग कर रहा है।
ऑपरेशन: DCP भावेश रोजिया की टीम ने बिना कोई शोर किए उसे घेरा और दबोच लिया। गिरफ्तारी के वक्त वह अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पुलिस की पुख्ता जानकारी के आगे उसकी एक न चली। रहमान डकैत की गिरफ्तारी से 6 राज्यों की पुलिस को बड़ी राहत मिली है। अब पुलिस का अगला कदम इसके वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करना और उन संपत्तियों को कुर्क करना है, जो लूट के पैसों से बनाई गई हैं।
Edited By: Navin Rangiyal