1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. मध्यप्रदेश
  4. Bhopal Municipal Corporation under scrutiny for cow slaughter at its slaughterhouse;
Last Modified: शनिवार, 10 जनवरी 2026 (17:12 IST)

भोपाल नगर निगम के स्लॉटर हाउस मेंं गोकशी मामले नगर निगम सवालों के घेरे मेंं, मानवाधिकार आयोग ने उठाए सवाल

Cow slaughter case in Bhopal Municipal Corporation's slaughter house
भोपाल। राजधानी भोपाल में नगर निगम के स्लॉटर हाउस में गोकशी को लेकर सियासत गरम है। मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस पूरे मामले को लेकर नगर निगम समेत पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए है। प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भोपाल में सरकारी पैसे से बने नगर निगम के स्लॉटर हाउस में गौ हत्या कर गौ माँस को पैक कर के बेंचने के मामले में पकड़ाए असलम चमड़ा के विरुद्ध शिकायत थी कि वो अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को भोपाल ला कर गौ कशी करवाता है।

उन्होंने आगे लिखा कि हमने पुलिस को जाँच के निर्देश दिए थे तत्पश्चात पुलिस ने असलम के बयान को हो सत्य मान कर हमको जो रिपोर्ट प्रेषित की थी उसके अनुसार तो नगर निगम ही इस क़तलख़ाने का संचालक है। तो अब तय करिए कि निगम के किस अफसर पर मुक़दमा बनना चाहिए? इसकी जड़ें गहरी हैं भोपाल के आदमपुर छावनी में मृत पशुओं के शव के निष्पादन के लिए 5 करोड़ की सरकारी लागत से बना रेंडरिंग (carcass) प्लांट भी इसी असलम चमड़े के पास है। ये दोनों संयंत्र इस से वापस लेने होंगे और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की जाँच कर उन्हें भोपाल की पूज्य मातृ भूमि से बाहर खदेड़ना होगा

पूरा मामला 17 दिसंबर की रात को उस वक्त समाने आया जब हिंदू संगठनों ने पुलिस मुख्यालय के पास एक संदिग्ध ट्रक को रोका था। ट्रक में 26 टन मांस भरा था, जो नगर निगम के पीपीपी मोड पर संचालित स्लॉटर हाउस से निकला था। जब्त मांस की जांच के दौरान उसमें गोमांस की पुष्टि के बाद नगर निगम प्रशासन ने स्लॉटर हाउस को सील कर दिया है। वहीं संचालक असलम कुरैशी सहित दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

वहीं नगर निगम के स्लॉटर हाउस में गोकशी को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरा है।  कांग्रेस ने नगर निगम कार्यालय का घेराव करते हुए स्लॉटर हाउस पर बुलडोजर चलाने की मांग की है। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता अमित शर्मा ने आरोप लगाया कि यह अवैध धंधा नगर निगम अधिकारियों और भाजपा नेताओं की मिलीभगत से चल रहा था। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि 35 करोड़ रुपये की लागत से बने इस आधुनिक प्लांट में निगरानी क्यों नहीं की जा रही थी। 
 
वहीं महापौर मालती राय और नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने आधिकारिक पुष्टि के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए संयंत्र को सील करने के निर्देश दिए।अतिरिक्त आयुक्त हर्षित तिवारी ने कहा कि मृत पशुओं के निपटान और मांस के परिवहन के नियमों के उल्लंघन की गहन जांच की जा रही है। यह मामला अब केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जिसमें जवाबदेही को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। 
ये भी पढ़ें
सीधी की आदिवासी बेटी अनामिका का डॉक्टर बनने का सपना होगा साकार