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कफ सिरप बना ‘कफन सिरप’, अफ्रीका से लेकर भारत तक गईं कई जानें, फिर क्‍यों लगाम नहीं लगा पाई सरकारें

किस उम्र के बच्‍चों को कितने डोज कफ सिरप के देने चाहिए, क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर्स ?

Updated: मंगलवार, 7 अक्टूबर 2025 (14:37 IST)
मध्यप्रदेश में कफ सिरप ‘कोल्ड्रिफ़’ पीने से 16 बच्चों की मौत के मामले ने पूरे देश को हिला के रख दिया है। इस घटना के बाद पूरे मेडिसिनल प्रक्रिया के साथ ड्रग के धंधे में सक्रिय मेडिसिन माफिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब भारत में बने कफ सिरप से बच्चों की मौत हुई है। 2023 में गाम्बिया में 70 और उज़्बेकिस्तान में 18 बच्चों की मौत का कारण भी भारत में बना ज़हरीला कफ सिरप ही था।

यानी मध्‍यप्रदेश में बनने वाला कफ सिरप बच्‍चों के लिए कफन सिरप साबित हो रहा है। सवाल यह है कि अब तक अफ्रीका से लेकर भारत तक 34 बच्‍चों की मौत के बाद भी सरकारें ऐसे मौत के कफन पर लगाम क्‍यों नहीं लगा पाई हैं, या फिर क्‍यों ऐसे जानलेवा कफ सिरप डॉक्‍टरों द्वारा प्रिस्‍क्राइब्‍ड कर रहे हैं। वेबदुनिया ने डॉक्‍टरों से चर्चा कर जाना कि आखिर बच्‍चों के लिए कितना खतरनाक है कफ सिरप और किस उम्र के बच्‍चों को कितने डोज कफ सिरप के देने चाहिए।

कोल्ड्रिफ कफ सिरप : अब तक क्या हुआ : अब तक की कार्रवाई में कफ सिरप पीने से 16 बच्चों की मौत मामले में डॉ. प्रवीन सोनी को गिरफ्तार कर निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि डॉ प्रवीण सोनी ने ही ज्यादातर बच्चों को ये कफ सिरप लिखा था। साथ ही कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। मध्यप्रदेश पुलिस ने दवा बनाने वाली कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। मध्यप्रदेश सरकार ने शनिवार को कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री, भंडारण और वितरण पर भी प्रतिबंध लगा दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारी औषधि निरीक्षक छिंदवाड़ा गौरव शर्मा, औषधि निरीक्षक जबलपुर शरद कुमार जैन और राज्य के उप संचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन शोभित कोस्टा को निलंबित और आईएएस अधिकारी ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य का ट्रांसफर कर दिया है। इसके साथ ही पुलिस ने जांच के लिए 12 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

सैंपल में मिला जहरीला रसायन : बच्चों की मौत मामले में जांच के बाद राज्य सरकार ने कहा कि जांच किए गए सैंपल में 48.6% डायथिलीन ग्लाइकॉल, एक जहरीला रसायन था। मध्य प्रदेश पुलिस ने चेन्नई स्थित 'श्रीसन फार्मास्युटिकल मेकर' के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जो अपने इंडियामार्ट पेज पर कफ सिरप, प्रोटीन पाउडर, फार्मास्युटिकल सिरप और हर्बल चाइल्ड ग्रोथ सिरप का व्यापारी होने का दावा करती है।

यह कॉम्‍बिनेशन 4 साल से कम बच्‍चों को नहीं देने की गाइडलाइन है : हुकुमचंद अस्‍पताल में चाइल्‍ड स्‍पेशलिस्‍ट और पूर्व सीएमएचओ डॉ प्रवीण जडिया ने बताया कि केंद्र सरकार के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की क्‍लियर कट गाइडलाइन है कि सीपीएम और पीपीई का कॉम्‍बिनेशन 4 साल से बच्‍चों को देना ही नहीं है। ज्‍यादातर दवाइयों में यह कॉम्‍बिनेश होता है। अब यह सवाल यह है जब यह देना ही नहीं है तो बाजार में क्‍यों आ रहा है। डॉक्‍टर्स इसे लिख भी रहे हैं। दिलचस्‍प बात तो यह है कि इंदौर के ज्‍यादातर लीडिंग प्रैक्‍टिसनर्स को पता ही नहीं कि इसे लेकर क्‍या गाइड लाइन है।

मौत की वजह एडल्‍ट्रेशन है : इंदौर के जाने माने डॉ प्रवीण दानी ने बताया कि जो कुछ भी मीडिया में आ रहा है, उस आधार पर मैं अपनी बात कहूं तो बच्‍चों की मौत की वजह एडल्‍ट्रेशन है, यानी जो कॉम्‍बिनेशन (डाइथिलीन ग्लाइकाल) उस कफ सिरप में था वो ज्‍यादा मात्रा में था। ऐसे में सवाल डॉक्‍टर के ऊपर नहीं उठना चाहिए। सवाल मैन्‍यूफैक्‍चरिंग पर उठना चाहिए। जब यह कॉम्‍बिनेशन तय मात्रा से ज्‍यादा नहीं दिया जाना चाहिए तो ये बाजार में आया कैसे और मिल कैसे रहा है।

1990 में शुरू हुई कंपनी : दिलचस्प बात यह है कि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के दस्तावेजों के अनुसार, श्रीसन फार्मास्युटिकल्स नाम की एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी थी, जिसके एक निदेशक का नाम 'रंगनाथन गोविंदराजन' था। एमसीए के दस्तावेजो के मुताबिक इस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की स्थापना 1990 में हुई थी, लेकिन रजिस्ट्रर से इसे हटा दिया गया था। आमतौर पर कंपनियों का रजिस्ट्रर से तब नाम हटा दिया जाता है जब वे नियमित रूप से रेगूलेटरी फाइल जमा नहीं करतीं। इस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के पते और इंडियामार्ट और उत्पाद की पैकेजिंग पर दिए गए पते अलग-अलग हैं, लेकिन चेन्नई के एक ही इलाके में हैं।
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