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Dussehra : विजयादशमी के दिन करें 1 खास उपाय और पाएं संकटों से मुक्ति

Updated: रविवार, 25 अक्टूबर 2020 (08:31 IST)
मनुष्य के जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं किंतु यदि संकटों की अनवरत निरंतरता बनी रहे हो मनुष्य निराश व अवसादग्रस्त हो जाता है। वह अपने भाग्य को कोसता हुआ यह चिंतन करने पर विवश हो जाता कि क्या वह भाग्यहीन है! 
 
हमारे शास्त्रों में ऐसे अनेक उपायों का उल्लेख है जो किसी भी मनुष्य के जीवन के संकटों को कम करने में सक्षम होते हैं। आज हम 'वेबदुनिया' के पाठकों को ऐसा ही एक उपाय बताएंगे जिसके विजयादशमी के दिन करने से जीवन में विजय की सुनिश्चितता बढ़ जाती है एवं संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। 
 
करें यह उपाय- विजयादशमी से एक दिन पूर्व सायंकाल अशोक वृक्ष की पंचोपचार पूजा-अर्चना करें, उसकी जड़ों में जल का सिंचन करें, उसके समीप गौघृत के दीप का प्रज्ज्वलन करने के उपरांत कुछ पीले चावल अर्पण कर उसे निमंत्रण देकर अपने घर आ जाएं फिर विजयादशमी के दिन आप प्रात:काल स्नान करने के उपरांत अशोक वृक्ष की पंचोपचार पूजा-अर्चना करें, उसकी जड़ों में जल का सिंचन करें, उसके समीप गौघृत के दीप का प्रज्ज्वलन करने के उपरांत उस अशोक वृक्ष से केवल एक पत्ता तोड़कर अपने सिर पर धारण कर अपने घर ले आएं। घर आने के पश्चात् पुन: उस पत्ते की पंचोपचार पूजा-अर्चना करें और उसे अपने तिजोरी या पूजा घर में ऐसे स्थान पर रखें, जहां बाहरी लोगों को वह दिखाई ना दें। 
 
इस उपाय को करने के पश्चात् आपको अपने जीवन में इसके लाभ मिलने आरंभ हो जाएंगे। अगले दशहरे पर इस पत्ते को किसी बहते जल में प्रवाहित कर पुन: इसी विधि से नवीन पत्ता अपने घर लें आएं। कुछ वर्षों पश्चात् आप पाएंगे कि आपके जीवन से परेशानियां शनै: शनै: विदा हो रही हैं और उन्नति, प्रगति व सफलताएं आपके द्वार पर दस्तक देने लगी हैं।
 
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com 
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लेखक के बारे में
पं. हेमन्त रिछारिया
ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया ज्योतिष प्रभाकर उपाधि से सम्मानित हैं। विगत 12 वर्षों से ज्योतिष संबंधी अनुसंधान एवं ज्योतिष से जुड़ी गलत धारणाओं का खंडन कर वास्तविक ज्योतिष के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहे हैं। कई ज्योतिष आधारित पुस्तकों का लेखन।.... और पढ़ें

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