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कभी योगा नहीं किया है तो इन आसान तरीकों से सीखें ध्यान और आसन

शनिवार,जून 20, 2020
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मेडिटेशन अर्थात ध्यान। ध्यान करना बहुत ही सरल है। मात्र 5 मिनट का ध्यान चमत्कारिक लाभ दे सकता है। आओ जानते हैं कि कोराना संकट के दौर और लॉकडाउन में ध्यान करना क्यों जरूरी है।
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वर्तमान में जीना ही ध्यान है। एकाग्रता ध्यान नहीं है। ध्यान का मूल अर्थ है जागरूकता, अवेयरनेस, होश, साक्ष‍ी भाव और दृष्टा भाव। ध्यान का अर्थ एकाग्रता नहीं होता। एकाग्रता टॉर्च की स्पॉट लाइट की तरह होती है जो किसी एक जगह को ही फोकस करती है, लेकिन ...
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मेडिटेशन को ही ध्यान लगाना केहते है, इसे दिनचर्या का हिस्सा बनाकर रोजाना करने से कई फायदे होते हैं। अगर अभी तक आपने मेडिटेशन को अपने रूटीन में शामिल नहीं किया है तो, ये 13 फायदे जानने के बाद आप
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सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ प्रक्रिया है। यह अकेला अभ्यास ही साधक को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है। इसके अभ्यास से साधक का शरीर निरोग
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अष्टांग योग का सातवां अंग है ध्यान। दरअसल ध्यान सातवीं सीढ़ी है। योग में ध्यान सातवीं स्टेप है, लेकिन वर्तमान में कुछ संस्थान ऐसे हैं जो व्यक्ति को डायरेक्ट ध्यान लगाने या सिखाने का कार्य करते हैं। उन्होंने अपनी अलग ध्यान विधियां विकसित करके उसकी ...
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दैनिक जीवन के विभिन्न कार्यों में स्वरों की स्थिति का बहुत महत्व देखा जाता है। स्वर ज्ञाता ज्योतिषियों की भांति इसका प्रयोग करते हैं। विभिन्न कार्यों की सफलता-असफलता,
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ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन करने के लिए सबसे पहले शांत चित्त होकर शरीर ढीला करके बिल्कुल सीधे होकर बैठें।
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हमारे सनातन धर्म में समाधिस्थ ऋषि मुनियों ने समाधि के कुछ लक्षण बताए हैं। आइए जानते हैं कि समाधि के अष्ट लक्षण कौन से होते हैं-
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ध्यान शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य के लिए बिलकुल निःशुल्क हानिरहित उपचार पद्धति है। जब भी एकाग्र मन से किसी भी विषय में सोचा जाए, मनन किया जाए तो वह शीघ्र फलित होने लगता है,
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विचारों को रोके नहीं, उन्हें आने दें। धीरे-धीरे आपका मन अपने आप शांत हो जाएगा। मन की इस अवस्था को ही ध्यान कहते हैं।
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आज का युवा और विपश्यना

मंगलवार,जनवरी 30, 2018
28 जनवरी को रतलाम विपश्यना केंद्र पर एक 10 दिवसीय शिविर का आयोजन सम्पन्न हुआ। जिसमें कुल 20-22 लोगों ने हिस्सा लिया। 13 युवा वर्ग के प्रतिभागी थे जिनकी औसत आयु 26 वर्ष के आसपास रही।
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विधि और क्रियाएं आपकी शारीरिक और मानसिक तंद्रा को तोड़ने के लिए है जिससे की आप ध्यानपूर्ण हो जाएं। यहां प्रस्तुत है ध्यान की सरलतम चार विधियां, लेकिन चमत्कारिक।
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ज्योतिष, आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक आधार पर तैयार विविध रंगों के चक्र द्वारा मन-मस्तिष्क को संतुलित करने में मदद मिलती है। इसमें रंग-निदान (कलर ट्रीटमेंट) के माध्यमों का भी ध्यान रखा जाता है। सही तरीके से ध्यान लगाने से इच्छाशक्ति का विकास होता है तथा ...
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मनुष्य में प्राणमयी शक्तियों को योग द्वारा, ध्यान द्वारा तथा सतत साधना से अति तीव्रता के साथ साध कर परिणाम प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की जा चुकी है। यह शक्ति शरीर की प्रत्येक नाड़ी में पाए जाने वाले द्रवों में सूक्ष्म रूप से रहती है। मनुष्य का ...
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अध्यात्म-विज्ञान के समन्वय पुरुष आचार्य महाप्रज्ञ के अनुसार मनुष्य का जीवन व्याधि और उपाधि इन दो दिशाओं में चलता है। व्याधि का तात्पर्य शारीरिक कष्ट और उपाधि का भावनात्मक कष्ट है और यह तीनों कभी-कभी एक साथ होते हैं। इन्हीं का तोड़ है भावातीत ध्यान।
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ध्यान की हजारों विधियां हैं। भगवान शंकर ने माँ पार्वती को 112 विधियां बताई थी जो 'विज्ञान भैरव तंत्र' में संग्रहित हैं। इसके अलावा वेद, पुराण और उपनिषदों में ढेरों विधियां है। संत, महात्मा विधियां बताते रहते हैं। उनमें से खासकर 'ओशो रजनीश' ने अपने ...
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जैन परंपरा में ध्यान का अत्यंत प्राचीन और विशिष्ट प्रयोग है ‘प्रेक्षाध्यान।’ प्राचीन जैन ग्रंथों से निकाल कर इसे श्‍वेतांबर तेरापंथी जैनाचार्य श्रीतुलसीजी ने आधुनिक रूप दिया है। प्रेक्षा ध्यान भी साक्षी, दृष्टा और विपश्‍यना ध्यान की तरह एक ध्यान ...
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देखो कि तुम क्या देख रहे हो और क्या होशपूर्वक देख रहे हो या कि यंत्रवत? देखो चारों ओर लोग किस तरह विचार और भावों की बेहोशी में जी रहे हैं। पुतलों की तरह खयालों में जी रहे हैं। कभी सभी से दूरी बनाकर उनका निरीक्षण करो। विपश्यना आपको खुद की स्थिति के ...
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संसार में धन और संन्यास में ध्यान का बहुत ज्यादा महत्व है। यदि आंतरिक जगत की यात्रा करना हो या मोक्ष पाना हो तो ध्यान जरूरी है। इसके अलावा संसार में रहकर शांतिपूर्ण और स्वस्थ जीवन जीना हो तो भी ध्‍यान जरूरी है। हमने ध्यान क्या, क्यों और कैसे इस विषय ...
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