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आडवाणी पर अटल का मुखौटा
नई दिल्ली। चुनावी मौसम को देखते हुए भाजपा ने अटल-आडवाणी की जोड़ी को नए रूप में उभारने की कोशिश शुरू कर दी है। जोड़ी में पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की छवि नरमपंथी और लालकृष्ण आडवाणी की कट्टरपंथी की रही है। इस 'संतुलित जोड़ी' की सफलता तथा स्वीकार्यता महत्वपूर्ण मानी जाती है। दशकों तक सलामत रही यह जोड़ी वाजपेयी की बढ़ती उम्र तथा स्वास्थ्य कारणों से राजनीतिक महत्व खोने लगी है। ऐसे में भाजपा के लिए जरूरी हो गया है कि इसमें किसी को स्थानापन्न किया जाए।वैसे भी भाजपा ने आडवाणी को अपनी ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर रखा है। लेकिन उनकी कट्टर छवि सर्वस्वीकार्यता में यदाकदा बाधक बनती रही है। इसलिए भाजपा ने नई जोड़ी बनाने की कवायद शुरू की है। नई जोड़ी में अटल की जगह आडवाणी लेंगे और आडवाणी की जगह पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यही वजह है कि साध्वी प्रज्ञा के मामले में आडवाणी ने पर्याप्त संयम का परिचय दिया है, जबकि राजनाथ सिंह दहाड़ रहे हैं। पार्टी सूत्र भी यह स्वीकार करते हैं कि प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार व्यक्ति को किसी आरोपी के पक्ष में आक्रामक नहीं होना चाहिए। इसलिए यह काम पार्टी अध्यक्ष पर ही छोड़ दिया गया है। गौरतलब है कि पहले तो पार्टी साध्वी मामले से पल्ला झाड़ती रही, लेकिन जब संघ ने संज्ञान लिया तथा भाजपा नेताओं को तलब कर मामले पर आक्रामक होने का निर्देश दिया तो राजनाथ सिंह खुल कर मैदान में उतर आए। कट्टरपंथ और नरम छवि का तालमेल : आडवाणी के नेतृत्व में अयोध्या अभियान के बाद 1996 में भाजपा सत्ता तक पहुँचने में कामयाब रही थी। उस समय से आडवाणी की छवि एक कट्टर हिन्दूवादी की रही है, जबकि वाजपेयी की नरम छवि के कारण विपक्ष ने उन्हें मुखौटा कहना शुरू कर दिया। भाजपा की रणनीति है कि वोट बटोरने के लिए पार्टी में एक कट्टर हिन्दुत्व का प्रतीक होना चाहिए जबकि सत्ता के शीर्ष तक पहुँचने के लिए स्वीकार्यता के मद्देनजर नेतृत्व की नरमपंथी छवि भी उभरना चाहिए।चूँकि आडवाणी प्रधानमंत्री पद के दावेदार घोषित किए जा चुके हैं इसलिए वे अब यदि पहले जैसी आक्रामकता दिखा कर वोट बटोरने का काम कर भी देते हैं और राजग सरकार बनाने की स्थिति में आ जाती है तो फिर स्वीकार्यता के नाम पर नेतृत्व का संकट खड़ा हो जाएगा। इसलिए नई जोड़ी में आडवाणी एक पायदान ऊपर चढ़ कर वाजपेयी की विरासत संभालेंगे और पार्टी अध्यक्ष राजनाथसिंह आडवाणी के नए अवतार होंगे। (एजेंसी)