ramcharitmanas
✕

Super Immunity: इम्‍युनिटी का ‘डबल डोज’ नई स्‍टडी से हैरान वैज्ञानिक, जिन्‍हें कोरोना हुआ वे 2000 प्रतिशत एंटीबॉडी के साथ हो गए ‘सुपर इम्‍यून’

Updated: मंगलवार, 21 दिसंबर 2021 (16:43 IST)
एक वक्‍त था जब कोरोना से बचने के लिए हर कोई अपनी इम्‍युनिटी को बढ़ाने के लिए तरह तरह की तरकीबें आजमा रहा था। ऐसा माना जा रहा था कि बस इम्‍युनिटी ही वो चीज है जिससे हम कोरोना वायरस से बच सकते हैं, यह बात सही भी है, जिन लोगों में इम्‍युनिटी पावर ज्‍यादा था, उन्‍हें कोरोना ने ज्‍यादा नुकसान नहीं पहुंचाया।

अब एक नई रिसर्च सामने आई है, जिसे एक खुशखबरी के तौर पर देखा जा रहा है। इस नई स्टडी में सामने आया कि ऐसे लोग जो वैक्सीन लेने के बाद भी कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं, उनके शरीर में ‘Super Immunity’ मिली  है। यानि ऐसे लोगों के पास इम्‍युनिटी का डबल डोज मिल गया है।

यह स्‍टडी अमेरिका के ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी में एक छोटे से ग्रुप में की गई। जब इसका रिजल्ट आया तो वैज्ञानिक हैरान थे। उन्‍हें समझ नहीं आ रहा था कि ऐसे कैसे हुआ।

रिपोर्ट के मुताबिक, 26 लोगों पर ये टेस्ट किया गया। इसके बाद स्टडी में सामने आया कि वैक्सीन लेने के बाद भी जो लोग पॉजिटिव हुए हैं, उनके अंदर 2000 प्रतिशत से ज्यादा एंटीबॉडी बढ़ गई है।

यह कैसे हुआ, वैज्ञानिक हैरान! 
दरअसल, जिन लोगों पर ये रिसर्च की गई, उन्हें वैक्सीन लेने से पहले कभी कोरोना वायरस संक्रमण नहीं हुआ था, जबकि वैक्सीन लेने के बाद वो संक्रमित हुए थे और टेस्ट में पता चला कि ऐसे में लोगों में एंटीबॉडी की मात्रा एक हजार से 2 हजार प्रतिशत तक बढ़ गई है।

2000 प्रतिशत एंटीबॉडी!
एंटीबॉडी ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी में मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के प्रोफेसर और इस स्टडी को करने वाले फिकाडु ताफेसे के मुताबिक ‘स्टडी में हमने देखा कि इन लोगों में एंटीबॉडी का स्तर पर्याप्त मात्रा में बढ़ गया है और इसका प्रतिशत एक हजार से 2 हजार के बीच है। हमने स्टडी में पाया है कि एंटीबॉडी की ये मात्रा काफी ज्यादा है’

अब प्रोफेसर फिकाडु ताफेसे के साथ ही दूसरे वैज्ञानिक भी एंटीबॉडी की इस मात्रा को ‘Super Immunity’ कह रहे हैं।

प्रोफेसर फिकाडु ताफेसे ने मीडि‍या को बताया, ‘यह एक सुपर इम्युनिटी है’ 

खास बात यह है कि यह रिसर्च ओमिक्रॉन वायरस के संक्रमण के दौर में आ रही है, जब लोग संक्रमित हो रहे हैं। दुनिया में ओमिक्रॉन वेरिएंट तेजी से फैल रहा है। इसके साथ ही अभी यह भी तय नहीं है कि इस पर वैक्‍सीन काम करेगी या नहीं।

बता दें कि ओमिक्रॉन वेरिएंट इस वक्त दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में ओमिक्रॉन वेरिएंट फैल चुका है और अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में काफी ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में ये रिसर्च कारगर साबित हो सकती है। क्योंकि, ओमिक्रॉन वेरिएंट की चपेट में ऐसे भी लोग आ रहे हैं, जिन्होंने वैक्सीन की दोनों खुराक ले रखी है।

कोलंबिया विश्वविद्यालय की एक रिसर्च में पाया गया है कि फाइजर या मॉडर्न का बूस्टर शॉट लेने वाले रोगियों में मूल वायरस की तुलना में ओमिक्रॉन रोकने के लिए 6.5 गुना कम एंटीबॉडी थे, जिसका मतलब ये हुआ कि अकले बूस्टर शॉट भी ओमिक्रॉन को रोकने में काबिल नहीं हैं।

Show comments

आरक्षण विरोधी आंदोलन पर पूर्ण प्रतिबंध क्यों? हाईकोर्ट ने लगाई दिल्ली पुलिस को फटकार, जानिए क्या है पूरा मामला

पहले 10 लाख जमा किए, IDA ने फिर मांगे 4 लाख रुपए, राहुल गांधी के इंदौर में आयोजन में फिर अड़चन

Hyundai BAYON India : नए SUV का डिजाइन आया सामने, H-Edge लाइटिंग ने खींचा ध्यान; जानें क्या-क्या हुआ कन्फर्म

Samsung Galaxy A18 4G लॉन्च, 50MP कैमरा और 5000mAh बैटरी के साथ आया फोन; जानें कीमत और फीचर्स

Suzuki e-Access खरीदें या नहीं? आराम, बैटरी और रेंज में दमदार, क्या कुछ कमियां भी हैं

सभी देखें

PM मोदी के 76वें जन्मदिन पर UP में दीपोत्सव जैसा माहौल, सीतापुर में मोदी-योगी की आकृति तो मेरठ में 'आशीर्वाद का दीया' बना आकर्षण

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और सीएम डॉ. मोहन यादव ने की सेवा-संकल्प अभियान की शुरुआत, स्वामित्व अधिकार योजना के तहत 50 लाख संपत्तियों की होगी फ्री रजिस्ट्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर जगमगाया मध्यप्रदेश, शिप्रा तट-महाकाल महालोक में एक साथ जलाए गए 33.27 लाख दीये, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड

UPI विवाद पर हंसराज विश्वकर्मा का राहुल गांधी-अखिलेश पर निशाना , बोले- दोनों के बीच सांठगांठ

अंबेडकरनगर में 1100 बीघा जमीन पर आकार ले रहा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, पराली से बनेगी बायो गैस

अगला लेख