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ऑमिक्रॉन के लिए सीएसआईआर वैज्ञानिकों ने विकसित की आरटी-पीसीआर किट

Updated: गुरुवार, 27 जनवरी 2022 (13:23 IST)
नई दिल्ली, कोरोना वायरस उत्परिवर्तित (Mutate) होकर निरंतर अपना रूप बदल रहा है। ऐसे में, वायरस के नये उभरते रूपों की पहचान और उपचार चुनौतीपूर्ण हो गया है।

ऑमिक्रॉन जैसे कुछ रूपांतरित कोरोना वायरस के संक्रमण के मध्यम लक्षण देखे गए हैं, और इसके संक्रमण के कारण होने वाली मौतों के मामले भी कम हैं। लेकिन, कोरोना का ऑमिक्रॉन संस्करण दुनिया भर में जंगल की आग की तरह बेहद तेजी से फैल रहा है।

वर्तमान में, कोरोना के इस संस्करण का पता लगाना ‘एस-जीन ड्रॉप आउट’ या फिर संपूर्ण वायरल जीनोम के ‘एनजीएस (नेक्स्टजेन सीक्वेंसिंग)’ जैसे परीक्षणों पर निर्भर करता है।

हालांकि, ‘एस-जीन ड्रॉप आउट’ विधि वायरस संस्करण के प्रकार की सटीक पहचान करने में सक्षम नहीं है; तो वहीं, एनजीएस में लगने वाले समय, खर्च और इस सेवा को प्रदान करने वाले केंद्रों की सीमित संख्या के कारण इस पद्धति की अपनी सीमाएं हैं।

सीएसआईआर-सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट, लखनऊ के वैज्ञानिकों की एक टीम ने अपने औद्योगिक भागीदार बायोटेक डेस्क प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद के सहयोग से ऑमिक्रॉन संस्करण की विशिष्ट पहचान के लिए एक स्वदेशी आरटी-पीसीआर किट विकसित की है, जिसे इंडिकोव-ओम TM (INDICoV-OmTM) नाम दिया गया है।
ऑमिक्रॉन वेरिएंट का पता लगाने के लिए पूरी दुनिया में उपलब्ध कुछ गिनी चुनी किट्स में से यह एक विशिष्ट किट है।

इस अध्ययन से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता डॉ अतुल गोयल ने कहा कि यह किट ऑमिक्रॉन वेरिएंट की त्वरित और लागत प्रभावी पहचान करने में उपयोगी है। इसे भविष्य में कोविड संक्रमण और अन्य श्वसन संक्रमण के उभरते रूपों का पता लगाने के लिए भी अनुकूलित किया जा सकता है।

इस किट का परीक्षण एवं सत्यापन किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ में कोविड पॉजिटिव मरीजों के नमूनों में प्रोफेसर अमिता जैन द्वारा किया गया है।

यह किट फरवरी के मध्य तक उपलब्ध हो सकती है। डॉ. श्रद्धा गोयनका, प्रबंध निदेशक, बायोटेक डेस्क प्राइवेट लिमिटेड ने कहा है कि “हम नियामक अनुमोदन और किट की असेंबली पर काम कर रहे हैं, और जल्दी ही बाजार में इसके जारी होने के लिए आश्वस्त हैं।"

प्रोफेसर तपस के. कुंडू, निदेशक, सीएसआईआर-सीडीआरआई ने बताया कि "वर्तमान में सीडीआरआई किसी भी प्रकार के वायरल संक्रमण से निपटने हेतु चिकित्सीय और नैदानिकी (थेरप्यूटिक्स एवं डायग्नोस्टिक) दोनों ही पहलुओं पर  एंटी-वायरल शोध में पर्याप्त विशेषज्ञता हासिल कर रहा है।

सार्स-कोव-2 ऑमिक्रॉन (SARS-Cov-2 Omicron) की जांच/निदान हेतु यह किट भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) को स्वतंत्र सत्यापन के लिए प्रेषित की गई है, जिसके नियामक अनुमोदन के पश्चात यह भारत के लोगों के लिए उपलब्ध हो सकती है।"

शोधकर्ताओं में डॉ. गोयल के अलावा डॉ. नीति कुमार, डॉ. आशीष अरोड़ा, सुश्री सुरभि मुंद्रा, सुश्री वर्षा कुमारी, श्री कुंदन सिंह रावत और सुश्री प्रियंका पांडेय शामिल थीं। (इंडि‍या साइंस वायर)

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