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Corona का साइड इफेक्ट : 200 किमी पैदल चलकर गांव पहुंचा, पेड़ पर मचान बांधकर 14 दिन रहा क्वारनटाइन

Updated: मंगलवार, 5 मई 2020 (15:25 IST)
जयपुर। कोरोना लॉकडाउन में 200 किमी पैदल चलकर गांव पहुंचा एक युवक उस समय हैरान रह गया जब गांव वालों ने उसे गांव की सीमा पर ही रोक दिया। उसे गांव के बाहर पेड़ पर मचान बांधकर 14 दिन क्वारनटाइन रहना पड़ा।

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर तहसील के शेरपुरा गांव में 24 वर्षीय प्रवासी मजदूर को 14 दिन पृथक-वास की अनिवार्य अवधि गांव के बाहर खेत के एक पेड़ पर 'मचान' के उपर अस्थाई रूप से बनाए गए बसेरे में रहकर काटनी पड़ी।

कोरोना वायरस संकट के चलते पिछले माह 16 अप्रैल को लॉकडाउन समय में हुई वृद्धि के बाद कमलेश अजमेर जिले के किशनगढ़ से 200 किलोमीटर दूर भीलवाड़ा जिले के अपने गांव पैदल चल कर पहुंचा था।

जहाजपुर तहसील के शेरपुर गांव पहुंचने पर कमलेश मीणा को स्थानीय निवासियों ने कोरोना वायरस संक्रमण के फैलने के भय से गांव में प्रवेश करने पर रोक दिया और उसे एंकातवास में अस्थाई रूप से पेड़ पर बनाये गये 'मचान' पर बसेरा करना पड़ा।

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के मेडिकल दल ने मीणा को जांच के लिये नमूना देने के लिए बुलाया क्योंकि स्थानीय गांव वाले पहले उसकी जांच करवाना चाहते थे। जांच के आधार पर भीलवाड़ा के पृथक-वास में रहने का विकल्प दिया गया था।

हालांकि स्थानीय गांव वालों ने उसके बाद उसके गांव में पृथकवास में रूकने का प्रबंध करने का निर्णय लिया और कमलेश ने गांव के दूर खेत में रूकने का निर्णय लिया। गांव वालों ने उसके परिजनों के साथ मिलकर बांस का एक 'मचान' तैयार किया और पृथक-वास के दौरान मचान पर ही उसके खाने, पीने और अन्य आवश्यक सामान के लिये उसके पिता सागरमल ने प्रबंध किया।

शेरपुरा गांव के कोविड-19 नियंत्रण के प्रभारी और पंचायत प्राथमिक शिक्षा अधिकारी श्योजीराम मीणा ने बताया कि कमलेश ने 14 दिन का पृथकवास पूरा कर लिया है। मेडिकल दल प्रतिदिन उसकी जांच कर रहा है। उसमें किसी प्रकार का संक्रमण नहीं हुआ और वह अपने परिजनों के साथ रह रहा है।

ट्रैक्टर चालक दिहाड़ी मजदूरी कमलेश 14 अप्रैल को लॉकडाउन के आगे और बढ़ाये जाने के बाद अपने गांव जाने के लिये पैदल रवाना हुआ था।

राजस्थान में भीलवाड़ा जिला पहला कोरोना वायरस हॉटस्पाट बन कर उभरा था। प्रशासन और स्थानीय लोगों का ध्यान संक्रमण को रोकने पर था जिसमें एक बडी सफलता अर्जित की थी और भीलवाड़ा देशभर में संक्रमण को रोकने में एक मॉडल के रूप में उभरा था।

उल्लेखनीय है कि भीलवाड़ा में अब तक 37 संक्रमित मामले सामने आए हैं और केवल दो लोगों की मौत हुई है। 24 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है जबकि 4 लोगों का इलाज चल रहा है। (भाषा)

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