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Chhath Puja 2026 Checklist: नहाय-खाय से पारण तक: ऐसे करें छठ पूजा की संपूर्ण तैयारी, कोई भूल न हो

Updated: शनिवार, 7 नवंबर 2026 (16:17 IST)
Chhath Puja 2026: वर्ष 2026 में छठ पूजा का महापर्व 13 नवंबर से 16 नवंबर 2026 तक चलेगा। मुख्य पर्व 15 नवंबर 2026 को रहेगा। छठ पूजा महापर्व भगवान सूर्य और छठी मइया की उपासना का अत्यंत पवित्र, नियमबद्ध और कठिन व्रत है। इसमें स्वच्छता, पवित्रता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा जाता है। छठ पूजा की तैयारी को सुचारू रूप से करने के लिए आप इन स्टेप को फॉलो करें।
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1. पूजन सामग्री की सूची और खरीदारी (1-2 दिन पहले)

छठ पूजा में पारंपरिक और प्राकृतिक सामग्रियों का ही उपयोग किया जाता है। इन्हें समय रहते एकत्र कर लें:
सूप और दउरा (बांस के बर्तन): अर्घ्य देने के लिए नए बांस के सूप और फल-प्रसाद रखने के लिए बांस की बनी ढक्कनदार टोकरी (दउरा)।
मिट्टी का चूल्हा और बर्तन: ठेकुआ प्रसाद बनाने के लिए नया मिट्टी का चूल्हा और मिट्टी के दीये/ढक्कन।
मौसमी फल व सब्जियां: गन्ना (पत्ते और जड़ सहित), नारियल (पानी वाला), सुथनी, शकरकंद (अल्हुआ), कच्ची हल्दी व अदरक के पौधे, नींबू (बड़ा/डाभ नींबू), केला (पूरा घौद), सेब, संतरे, और सिंघाड़ा।
अन्य सामग्रियां: ठेकुआ बनाने के लिए नया गेहूं, गुड़, शुद्ध देसी घी, अक्षत (चावल), सिंदूर (लाल/पीला), कपूर, धूपबत्ती, सूती धागा (सूत) और लाल/पीला कपड़ा।
 

2. घर की सफाई और रसोई की पवित्रता

घर का शुद्धि: छठ पर्व शुरू होने (नाहाय-खाय) से पहले पूरे घर, विशेषकर रसोईघर की deep cleaning (गहरी सफाई) करें।
नए बर्तन: प्रसाद पकाने के लिए केवल नए या पूरी तरह से साफ पीतल/तांबे और मिट्टी के बर्तनों का ही उपयोग करें। प्रसाद बनाने के लिए स्टील या लोहे के पुराने इस्तेमाल किए गए बर्तनों से परहेज किया जाता है।
अलग स्थान: व्रत का प्रसाद पकाने और रखने के लिए घर में एक पवित्र और स्वच्छ स्थान तय करें, जहाँ परिवार के अन्य सदस्य जूते-चप्पल पहनकर न जाएँ।
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3. प्रसाद की तैयारी (गेहूं व चावल धोना और सुखाना)

गेहूं और चावल की सफाई: खरना और अर्घ्य के प्रसाद (ठेकुआ, खजूर) के लिए गेहूं और चावल को पहले ही धोकर छत पर लाल कपड़े पर सुखाया जाता है।
पहरा देना: सुखाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि पक्षी या कोई जानवर इसे जूठा न करें।
पिसवाई: गेहूं और चावल को चक्की पर पिसवाते समय यह सुनिश्चित करें कि चक्की पूरी तरह साफ हो और उसमें पहले से पिसा हुआ कोई अन्य अनाज न मिला हो।
 

4. चारों दिनों के अनुसार चरणबद्ध तैयारी

पहला दिन: नहाय-खाय
व्रती सूर्योदय के समय किसी पवित्र नदी, तालाब या घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
घर में सात्विक भोजन (कद्दू/लौकी की सब्जी, चने की दाल और अरवा चावल) शुद्ध देसी घी में बनाएं।
भोजन में सेंधा नमक का ही प्रयोग करें और लहसुन-प्याज का उपयोग बिल्कुल न करें।
 
दूसरा दिन: खरना
पूरे दिन निर्जला व्रत रखें।
शाम के समय नए मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से गुड़, अरवा चावल और दूध की खीर (रसियाव) तथा सोहारी (रोटी) बनाएं।
शाम को सूर्य देव और छठी मइया को भोग लगाकर व्रती प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके बाद से 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
 
तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (पहला अर्घ्य)
दोपहर से ही परिवार के सदस्य मिलकर ठेकुआ और अन्य पारंपरिक प्रसाद तैयार करते हैं।
बांस के सूप में सभी मौसमी फल, ठेकुआ, दियरी और सिंदूर सजाएं।
शाम को सूर्यास्त से पहले घाट (नदी/तालाब या कृत्रिम जलकुंड) पर पहुँचें।
व्रती जल में खड़े होकर अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं।
 
चौथा दिन: उषा अर्घ्य (दूसरा अर्घ्य) और पारण
तड़के (सूर्योदय से पूर्व) पुनः घाट पर पहुँचें।
उदीयमान (उगते) सूर्य देव को अर्घ्य दें और छठी मइया से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
अर्घ्य के बाद घाट पर ही या घर आकर कच्चे दूध, जल और प्रसाद खाकर व्रत का 'पारण' (व्रत खोलना) करें।
 

ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें:

पवित्रता का नियम: छठ पूजा में स्पर्श की शुद्धता का बहुत महत्व है। प्रसाद छूने से पहले हाथ-पैर अवश्य धोएं।
लहसुन-प्याज से परहेज: पर्व के दौरान घर में पूरी तरह से सात्विक माहौल रखें और लहसुन-प्याज का प्रयोग बंद कर दें।
श्रद्धा और शांति: छठ पूजा नियम से ज्यादा भाव और श्रद्धा का पर्व है। पूजा के दौरान मन को शांत और प्रसन्न रखें।
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