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सरोकार समाज से

- राजकुमार सोनी

Written By WD
Updated: शुक्रवार, 24 जुलाई 2009 (17:22 IST)
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आर्थिक विकास तेज होने के साथ ही सामाजिक क्षेत्र के विकास में तेजी आई है। राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा सामाजिक योजनाएँ चलाई जा रही हैं। स्नातक स्तर पर समाज विज्ञान की पढ़ाई करके आप भी जुड़ सकते हैं इस क्षेत्र से और अपने करि‍यर की नई ऊँचाइयों को छू सकते हैं।

बारहवीं पास करने के बाद अधिकतर छात्रों की समस्या होती है कि वे कौन-सा विषय लें, जो आगे उनके लिए करि‍यर का रास्ता खोले। कई छात्रों और अभिभावकों के मन में विषय के चयन को लेकर दुविधा रहती है। आम धारणा यह है कि कला विषयों का चुनाव वही छात्र करते हैं, जिन्हें अन्य विषयों में दाखिला नहीं मिलता है। पर, अब स्थिति बदल चुकी है। कला विषयों को लेकर छात्र और अभिभावकों की सोच बदली है और साथ ही इन विषयों की पढ़ाई के बाद नौकरी की संभावना भी काफी बढ़ चुकी है।

क्‍या है सोशल साइंस?
सोशल साइंस/सोशल स्टडीज अथवा ह्यूमैनिटीज के अंतर्गत समाज के विभिन्न आयामों को समझने की कोशिश की जाती है, जिसमें राजनीति, अर्थव्यवस्था, इतिहास, समाजशास्त्र और भूगोल आदि विषय शामिल हैं। पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर यही विषय नए क्षेत्रों में विकसित हो जाते हैं और इन नए विषयों के अंतर्गत सोशियल मेडिसिन, साइंस एंड पॉलिसी, एजुकेशन स्टडीज और डेवलपमेंट स्टडीज आदि शामिल हो जाते हैं।

क्‍यों पढ़ें सोशल साइंस?
अब सवाल यह उठता है कि सोशल साइंस क्‍यों पढ़ा जाए? दरअसल, सोशल साइंस के अंतर्गत पढ़ाए जाने वाले विषयों की मदद से हमें उस समाज को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है, जिसमें हम रहते हैं। उदाहरण के लिए इकोनॉमिक्‍स हमें समाज के एक बहुत बड़े आयाम को समझने में मदद करता है।

इसी विषय के कारण हम एक कर्मचारी और उसके बॉस के बीच के संबंधों को समझ पाते हैं। हम यह समझ पाते हैं कि कैसे बदलते समय और बदलती अर्थव्यवस्था के बीच यह संबंध भी बदला है। इतना ही नहीं, आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थान में भी छात्रों को ह्यूमेनिटी विषयों को अनिवार्य रूप से पढऩा पड़ता है।

बढ़ रहा है महत् व
वर्तमान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में मानविकी के विषयों की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। पूरा विश्व गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है और ऐसे में सोशल साइंस के विषयों के महत्व को फिर से स्वीकार किया जाने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सोशल साइंस को महत्व दिया गया होता, तो आर्थिक संकट की इस स्थिति को हम टाल सकते थे। इंजीनियरिंग, मेडिसि‍न और मैनेजमेंट को पूरी तरह से टेक्‍निकल विषय बना दिया गया है। छात्रों को इन विषयों और समाज के बीच के संबंधों के बारे में कभी कुछ बताया ही नहीं जाता है। इस वजह से नैतिकता का पतन हुआ है।

टीचिंग एथिक्‍स और समाज के प्रति जिम्‍मेदारी जैसे विषय पाठ्यक्रम से पूरी तरह बाहर निकाल दिए गए हैं और यही वजह है कि लोग यह भूलते जा रहे हैं कि समाज के प्रति भी हमारी कोई जिम्‍मेदारी होती है। आर्थिक मंदी भी इसी सोच का नतीजा है। इसलिए यह जरूरी है कि छात्रों को यह भी सिखाया जाए कि किसी व्यक्‍ति‍ की गतिविधियों का समाज पर क्‍या प्रभाव पड़ रहा है, यह ध्यान में रखना भी जरूरी है और यह सोशल साइंस के माध्यम से ही संभव है। क्रमश:...

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