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Written By WD

नाम में पड़ोगे तो रह जाओगे बेनाम!

गुरु नाम तक्षशिला
-मनीष शर्म
तक्षशिला में लल्लू नामक एक विद्यार्थी पढ़ता था। वह मेहनती और बुद्धिमान था साथ ही सहपाठियों की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता था। सभी उसे स्नेह प्यार करते थे, लेकिन उसे एक बात हमेशा चुभती थी कि मेरा नाम लल्लू क्यों है। एक दिन उसने गुरु से अपना कोई सम्मानजनक नाम रखने का आग्रह किया। इस पर गुरु बोले- ठीक है पुत्र, एक बार तुम आसपास के गाँवों में घूम आओ। लौटने पर मैं तुम्हारा नाम बदल दूँगा।

घूमते हुए लल्लू एक गाँव पहुँचा। वहाँ शवयात्रा को देखकर उसने एक व्यक्ति से पूछा- ये किसकी अर्थी है। व्यक्ति- यह जीवन नाम के व्यक्ति की अर्थी है। इस पर लल्लू हैरानी से बोला- अरे, जीवन भी मर सकता है भला! व्यक्ति- क्यों नहीं। नाम जीवन हो या मृत्यु, मरना तो सभी को है। तुम तो बड़े लल्लू हो, जो इतना भी नहीं जानते। उसकी बात सुनकर लल्लू का मुँह उतर गया। वह गाँव के मंदिर में जाकर बैठ गया। तभी एक बालक-बालिका उसके पास भिक्षा माँगने आए।

झोली में से सत्तू निकालकर उनके कटोरे में डालते हुए लल्लू ने पूछा- तुम्हारे नाम क्या हैं? बालक बोला- मेरा नाम कुबेर है और ये मेरी बहन लक्ष्मी है। नाम सुनते ही लल्लू की हैरानी और बढ़ गई। उसने तक्षशिला लौटने का निर्णय किया।

रास्ते में उसे एक बूढ़ा मिला। वह बोला- बेटा, मैं तक्षशिला जा रहा हूँ, लेकिन मैं रास्ता भूल गया हूँ। क्या तुम मेरी मदद करोगे? लल्लू- मैं भी वहीं जा रहा हूँ। आप मेरे साथ चल सकते हैं। अच्छा, ये तो बताएँ कि आपका नाम क्या है? बूढ़ा- पथिक। लल्लू- पथिक और पथ ही भूल गए। बूढ़ा- ये कौन-सी बात हुई। तुम कैसी बुद्धू जैसी बातें कर रहे हो। नाम तो सिर्फ पहचान के लिए होता है। अन्ततः वह आश्रम पहुँच गया। वहाँ गुरु ने पूछा- पुत्र, क्या तुम अब भी अपना नाम बदलना चाहते हो? लल्लू- नहीं गुरुजी, अब मैं अपना नाम नहीं बदलना चाहता।

दोस्तो, कहते हैं कि व्यक्ति की पहचान नाम से नहीं, उसके काम से होती है। नाम से तो व्यक्ति सिर्फ पहचाना जाता है। हालाँकि यह सामान्य सी बात है और हम सभी इसे समझते हैं। लेकिन कुछ लोग यह समझते हुए भी नासमझी दिखाते हैं। उन्हें भी लल्लू की तरह अपना नाम नहीं भाता। उन्हें हमेशा यह बात सालती रहती है कि उनका नाम अच्छा क्यों नहीं है।
वे सोचते रहते हैं कि उनका नाम कुछ और होता तो वे और भी बेहतर तरीके से खुद को प्रस्तुत कर पाते। ऐसे लोगों से हम पूछना चाहेंगे कि नाम में क्या रखा है? यदि गुलाब का नाम कुछ और होता तो क्या उसकी सुगंध कम हो जाती। यानी गुलाब इसलिए गुलाब है, क्योंकि उसके अंदर कुछ गुण हैं।

ऐसे ही आपके गुण अच्छे हैं, आपके विचार अच्छे हैं और आपके कर्म अच्छे हैं साथ ही आपके अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा है तो आपका नाम कुछ भी रहे, क्या फर्क पड़ता है। इन गुणों के सहारे सफलता पाकर आप अपना नाम कमा लेंगे। तब आपके उसी नाम को लोग आदर से पुकारेंगे, जिसकी आज हँसी उड़ाते होंगे।

इसके साथ ही कुछ लोगों की सोच होती है कि नाम बदलने से किस्मत भी बदल जाती है। यदि ऐसा होता तो हर व्यक्ति अपना नाम करोड़ीमल रखकर करोड़पति बन जाता। इस तरह नाम और किस्मत का कोई संबंध नहीं होता। यदि नाम के चक्कर में पड़ोगे तो बेनाम रह जाओगे। वैसे भी किस्मत बदलती है कर्म से, पुरुषार्थ से। इसलिए नाम की जगह यह सोचो आपके काम कैसे हैं। आपके काम अच्छे हैं तो फिर आपका नाम तो अच्छा होगा ही।

दूसरी ओर, कुछ लोग अपना नाम करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। इसके लिए फिर वे भले ही बदनाम हो जाएँ। वे मानते हैं कि बदनाम हुए तो क्या हुआ, नाम तो हुआ। अब ऐसा नाम होना भी किस काम का कि नाम ही डूब जाए। लोग आपको घृणा की दृष्टि से देखें। आप किसी के आदर्श न बन पाएँ। यहाँ तक कि कोई अपने बच्चे का नाम भी आपके उनके नाम पर न रखे। सोचें, किसी ने अपने बच्चे का नाम रावण, कंस या दुर्योधन रखा है। नहीं न। तो फिर ऐसे नाम से अनाम रहना ही ज्यादा अच्छा है।

तो फिर आज से ही अपने नाम को कोसना बंद कर दें और अपने काम की ओर ध्यान लगाएँ। यदि आप लगन और मेहनत से काम करेंगे तो यही आपके काम आएगा। इससे ही आपको नाम और पहचान दोनों मिलेगी।
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