ओह! शायद राँग नंबर लग गया
फोन की घंटी बजने पर नौकरानी फोन उठाकर बोली- हलो। सामने से किसी आदमी की आवाज आई - कौन? नौकरानी- मैं शकुबाई, इस घर की नौकरानी। आदमी- इस घर में तो कोई नौकरानी नहीं है। शकुबाई- मैं आज से ही आई हूँ। आदमी- अच्छा, मेमसाब कहाँ हैं। शकुबाई- वो तो ऊपर बेडरूम में हैं, अपने पति के साथ। आदमी (गुस्से से चिल्लाते हुए)- शटअप, उसका पति तो मैं हूँ। वो कोई और होगा। शकुबाई- अरे, मुझे लगा कि वही उसका घरवाला है। आदमी- बहुत हो गया अब छोड़ूँगा नहीं उसे। (कुछ सोचकर) शकुबाई! क्या तुम लाख रुपए कमाना चाहोगी। शकुबाई- जी साब। आदमी- ठीक है, इसके लिए तुम्हें मेरा एक काम करना होगा। शकुबाई- क्या? आदमी- तुम मेरे स्टडी रूम में जाओ। वहाँ अलमारी में रखी पिस्तौल निकालकर मेमसाब और उस आदमी को खत्म कर दो। शकुबाई- अच्छा, मैं एक मिनट में आई। आप फोन चालू रखना। इसके बाद शकुबाई ने बेडरूम में जाकर दोनों को भून दिया। और वापस आकर बोली-साब, काम हो गया है। दोनों मर चुके हैं। अब बताओ, इनका क्या करना है? आदमी- बहुत अच्छा, अब एक काम करो, इन्हें घर के पीछे बने स्वीमिंग पूल में फेंक दो। शकुबाई-साब, इस बंगले में तो कोई स्वीमिंग पुल नहीं है। आदमी- क्या बात कर रही हो। तुमने पीछे जाकर देखा। शकुबाई- हाँ साब, मैंने पूरा बंगला ध्यान से देखा है। आदमी-एक मिनट, तुम्हारा फोन नंबर 22556644 है। शकुबाई- नहीं, यह तो 22556643 है। आदमी- ओह! सॉरी, शायद राँग नंबर लग गया।दोस्तो, देखा आपने, यह राँग नंबर का खेल कितना खतरनाक हो सकता है। भले ही यह एक चुटकुला हो, लेकिन इतना तो तय है कि जब भी कोई राँग नंबर लगता है तो अटेंड करने वाले को झुँझलाहट तो होती ही है। लोग फोन लगाते ही एकदम शुरू हो जाते हैं कि फलाँ से बात कराना। वे यह पूछने की जहमत ही नहीं उठाते कि उन्होंने सही नंबर डायल किया है या नहीं।
वे तो जल्दी में होते हैं और यही जल्दबाजी या दूसरे शब्दों में कहें तो लापरवाही राँग नंबर लगने का सबसे बड़ा कारण होती है। साथ ही जब उन्हें यह पता लगता है कि उन्होंने गलत नंबर लगा दिया है तो बिना अफसोस जताए वे फोन काट देते हैं, क्योंकि अधिकतर लोगों में टेलीफोन एटीकेट्स जो नहीं होते। यानी उनमें न तो टेलीफोन हैंडल करने का सलीका होता है और न ही बातचीत करने का।आज जबकि टेलीफोन या मोबाइल आपके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हों, तब यह सलीका सीखना हमारे लिए और भी जरूरी हो जाता है। आज बड़ी से बड़ी बिजनेस डीलिंग भी टेलीफोन के जरिये ही हो जाती है। आप भारत में बैठकर अमेरिका के व्यापारी से डील फाइनल कर सकते हैं। मोबाइल से तो आदमी को आज विश्व में कहीं पर भी और किसी भी समय पकड़ा जा सकता है। यानी इससे काम जल्दी बनता है। लेकिन यहाँ जल्दी से तात्पर्य लापरवाही से नहीं है। अब तो बहुत सी कंपनियाँ टेलीफोन से ही इंटरव्यू कर उम्मीदवारों का प्रारंभिक चयन कर लेती हैं, क्योंकि टेलीफोन पर बातचीत कर आदमी के व्यक्तित्व के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है। इसलिए हम सभी को टेलीफोन एटीकेट्स आना चाहिए। और अंत में, कल विश्व दूरसंचार दिवस है। इस अवसर पर टेलीफोन एटीकेट्स से संबंधित कुछ छोटी-छोटी किन्तु जरूरी बातें- 1. फोन उठाते ही सबसे पहले अभिवादन कर अपना परिचय दें, फिर जिनसे बात करनी हो उनके बारे में पूछें। 2. सामने वाले की बात को धैर्यपूर्वक सुनें। 3. बातचीत में सरल शब्दों का प्रयोग करें। 4. कार्यालयीन बातचीत में प्वाइंट्स नोट करते जाएँ ताकि बाद में फोन न लगाना पड़े। 5. बात करते समय शिष्टता का विशेष ध्यान रखें। 6.
किसी भी बात को विनम्रता से पूछें और इसी तरह जवाब भी दें। 7. फोन पर वाद-विवाद से बचें। 8. बात खत्म होने की औपचारिकता पूर्ण होने के बाद ही फोन रखें। 9. राँग नंबर लगने पर सॉरी जरूर कहें। 10. वाहन चलाते समय मोबाइल पर बातचीत न करें। क्या कहा, राँग नंबर था! लेकिन तुमने तो घंटेभर तक बात की। कमाल है!!
लेखक के बारे में
मनीष शर्मा