Buddhism, Pilgrimage Site | बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थस्थल
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(1) लुम्बिनी : जहाँ बुद्ध का जन्म हुआ।
(2) बोधगया : जहाँ बुद्ध ने 'बोध' प्राप्त किया।
(3) सारनाथ : जहाँ से बुद्ध ने दिव्यज्ञान देना प्रारंभ किया।
(4) कुशीनगर : जहाँ बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ।
(1) लुम्बिनी :
यह स्थान नेपाल की तराई में पूर्वोत्तर रेलवे की गोरखपुर-नौतनवाँ लाइन के नौतनवाँ स्टेशन से 20 मील और गोरखपुर-गोंडा लाइन के नौगढ़ स्टेशन से 10 मील दूर है।
(2) बोधगया :
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(3) सारनाथ :
बनारस छावनी स्टेशन से पाँच मील, बनारस-सिटी स्टेशन से तीन मील और सड़क मार्ग से सारनाथ चार मील पड़ता है। यह पूर्वोत्तर रेलवे का स्टेशन है और बनारस से यहाँ जाने के लिए सवारियाँ- ताँगा, रिक्शा आदि मिलते हैं। सारनाथ में बौद्ध-धर्मशाला है। यह बौद्ध-तीर्थ है।
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सन् 1905 ई. में पुरातत्व विभाग ने यहाँ खुदाई का काम प्रारंभ किया। इतिहास के विद्वानों तथा बौद्ध-धर्म के अनुयायियों का इधर ध्यान गया। तब से सारनाथ महत्व प्राप्त करने लगा। इसका जीर्णोद्धार हुआ, यहाँ वस्तु-संग्रहालय स्थापित हुआ, नवीन विहार निर्मित हुआ, भगवान बुद्ध का मंदिर और बौद्ध-धर्मशाला बनी। सारनाथ अब बराबर विस्तृत होता जा रहा है।
जैन ग्रंथों में इसे सिंहपुर कहा गया है। जैन धर्मावलंबी इसे अतिशय क्षेत्र मानते हैं। श्रेयांसनाथ के यहाँ गर्भ, जन्म और तप- ये तीन कल्याण हुए हैं। यहाँ श्रेयांसनाथजी की प्रतिमा भी है यहाँ के जैन मंदिरों में। इस मंदिर के सामने ही अशोक स्तम्भ है।
(4) कुशीनगर :
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अन्य तीर्थ स्थल :
तथागत के निर्वाण के पश्चात उनके शरीर के अवशेष (अस्थियाँ) आठ भागों में विभाजित हुए और उन पर आठ स्थानों में आठ स्तूप बनाए गए हैं। जिस घड़े में वे अस्थियाँ रखी थीं, उस घड़े पर एक स्तूप बना और एक स्तूप तथागत की चिता के अंगार (भस्म) को लेकर उसके ऊपर बना। इस प्रकार कुल दस स्तूप बने।
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श्रावस्ती का स्तूप:
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श्रावस्ती बौद्ध एवं जैन दोनों का तीर्थ है। यहाँ बुद्ध ने चमत्कार दिखाया था। तथागत दीर्घकाल तक श्रावस्ती में रहे थे। अब यहाँ बौद्ध धर्मशाला है तथा बौद्धमठ भी है। भगवान बुद्ध का मंदिर भी है।
साँची का स्तूप:
भोपाल से 28 मील दूर और भेलसा से 6 मील पूर्व साँची स्टेशन है। उदयगिरि से साँची पास ही है। यहाँ बौद्ध स्तूप हैं, जिनमें एक की ऊँचाई 42 फुट है। साँची स्तूपों की कला प्रख्यात है। साँची से 5 मील सोनारी के पास 8 बौद्ध स्तूप हैं और साँची से 7 मील पर भोजपुर के पास 37 बौद्ध स्तूप हैं। साँची में पहले बौद्ध विहार भी थे। यहाँ एक सरोवर है, जिसकी सीढ़ियाँ बुद्ध के समय की कही जाती हैं।
चाँपानेर (पावागढ़) :
पश्चिम रेलवे की मुंबई-दिल्ली लाइन में बड़ौदा से 23 मील आगे चाँपानेर रोड स्टेशन है। वहाँ से एक लाइन पानी-माइंस तक जाती है। इस लाइन पर चाँपानेर रोड से 12 मील पर पावागढ़ स्टेशन है। स्टेशन से पावागढ़ बस्ती लगभग एक मील दूर है। बड़ौदा या गोधरा से पावागढ़ तक मोटर-बस द्वारा भी आ सकते हैं। पावागढ़ में प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप हैं।
कौशाम्बी:
इलाहाबाद जिले में भरवारी स्टेशन से 16 मील पर। यहाँ एक स्तूप के नीचे बुद्ध भगवान के केश तथा नख सुरक्षित हैं।
पेशावर :
पश्चिमी पाकिस्तान में प्रसिद्ध नगर है। यहाँ सबसे बड़े और ऊँचे स्तूप के नीचे से बुद्ध भगवान की अस्थियाँ खुदाई में निकलीं। यह स्तूप सम्राट कनिष्क ने बनवाया था।
बामियान :
अफगानिस्तान में बामियान क्षेत्र बौद्धधर्म प्रचार का प्रमुख केंद्र था। बौद्ध काल में हिंदू कुश पर्वत से लेकर कंदहार तक अनेकों स्तूप थे।
