बॉलीवुड 2010 : अभिनेताओं का स्कोरकार्ड

समय ताम्रकर|
अक्षय कुमार
(हाउसफुल, खट्टा मीठा, एक्शन रिप्ले, तीस मार खाँ)
पिछले वर्ष से अक्षय कुमार की फिल्में पिटने का क्रम इस वर्ष भी जारी रहा। खट्टा मीठा ने मुँह कड़वा कर दिया तो एक्शन रिप्ले को लोगों ने फास्ट फारवर्ड कर दिया। हाउसफुल की सफलता में मजा नहीं आया। असफल फिल्मों की बात करो तो अक्की, ‍सचिन तेंडुलकर का उदाहरण सामने रख देते हैं। कहते हैं कि क्या सचिन जीरो पर आउट नहीं होते। भैया अक्की, याद नहीं पड़ता कि सचिन ने लगातार इतनी खराब बैटिंग कभी की हो। अक्षय की अब सारी उम्मीद तीस मार खाँ पर टिकी हुई है।


(दबंग, वीर)
जो लोग कहते थे कि सलमान का दौर बीत चुका है, उन्हें ‘दबंग’ की सफलता ने मुँह तोड़ जवाब दे दिया। चुलबुल पांडे के रूप में उन्होंने ऐसी दबंगता दिखाई कि लोग दीवाने हो गए। ‘दबंग’ जैसी फिल्म सिर्फ सलमान खान ही चला सकते हैं। ‘वीर’ की असफलता ने सलमान का इस वर्ष का स्कोर 1-1 रखा। ‘वीर’ के पिटने का उन्हें अफसोस है क्योंकि इसकी कहानी सल्लू ने ही लिखी है। कुछ फिल्मों में उन्होंने छोटे-मोटे रोल भी किए और ‘बिग बॉस’ बनकर छोटे परदे पर भी राज किया। छा गए सल्लू।
अभिषेक बच्चन
(रावण, खेलें हम जी जान से)
पहले पीठ पीछे कहने वाले अब मुँह पर बोलने लगे हैं कि यदि छोटे बच्चन बिग बी के बेटे नहीं होते तो कब के फिल्म इंडस्ट्री से रिटायर हो गए होते। जूनियर बच्चन की फिल्में औंधे मुँह गिर रही हैं। ‘रावण’ को न मणिरत्नम बचा पाए और न ही ऐश्वर्या। ‘खेलें हम जी जान से’ के तो पहले हफ्ते में ही शो कैंसल करने की नौबत आन पड़ी। अकेले के दम पर फिल्म चला पाने का दम अभी भी जूनियर बच्चन के कंधों में नहीं है।
अमिताभ बच्चन
(रण, तीन पत्ती)
रण और तीन पत्ती देख तो बिग-बी के प्रशंसक भी पूछने लगे कि आखिर उन्हें इस तरह की फिल्मों को करने की क्या जरूरत है। ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के जरिये जरूर अमिताभ छोटे परदे पर छाए रहे। विज्ञापन, ब्लॉग और ट्विटर के जरिये उन्होंने अपने आपको चर्चा में बनाए रखा। अच्छी फिल्मों में अमिताभ को देखने की ख्वाहिश क्या वे अगले वर्ष पूरी करेंगे?
जॉन अब्राहम
(आशाएँ, झूठा ही सही)
जॉन ने अपनी इमेज ऐसी बना रखी है मानो वे सुपरसितारे हो, लेकिन हकीकत कुछ और यही बयाँ करती हैं। हमारी न माने तो आशाएँ और झूठा ही सही के निर्माता और वितरकों से पूछ लीजिए। इन फिल्मों ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। आशाएँ निराशा में बदल गईं और झूठा ही सही ने जॉन के स्टारडम की सच्ची तस्वीर पेश कर दी।
अजय देवगन
(तीन पत्ती, अतिथि तुम कब जाओगे?, राजनीति, वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई, आक्रोश, गोलमाल3, टूनपुर का सुपरहीरो)
नि:संदेह इस वर्ष के सुपरसितारे हैं अजय देवगन। अलग-अलग फिल्मों में अलग-अलग रोल कर जहाँ उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता साबित की, तो दूसरी ओर इन फिल्मों की सफलता ने उन्हें दमदार स्टार साबित किया। गोलमाल 3 और अतिथि तुम कब जाओगे में उन्होंने हँसाया। राजनीति में वे एक कुशल खिलाड़ी साबित हुए और वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई में हाजी मस्तान के चरित्र को उन्होंने जीवंत किया। बिना शोर-शराबे के अजय ने अपनी कामयाबी का डंका खूब बजाया।
रणबीर कपूर
(राजनीति, अंजाना अंजानी)
भविष्य के सुपरस्टार रणबीर कपूर ने ‘राजनीति’ में अपनी इमेज से हटकर भूमिका निभाई। तमाम कलाकारों की भीड़ में वे अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में कामयाब रहे। ‘अंजाना अंजानी’ के पिटने का उन्हें गम है, लेकिन ‍फिल्म ही इतनी खराब थी कि चार रणबीर भी इसे नहीं बचा सकते थे।



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