सिंह इज़ ब्लिंग :‍ फिल्म समीक्षा

समय ताम्रकर|
अक्षय कुमार कॉमेडी करते हुए ज्यादा अच्छे लगते हैं, लेकिन उनकी कॉमेडी तब और निखर जाती है जब अच्छी स्क्रिप्ट का साथ उन्हें मिलता है। 'सिंह इज़ ब्लिंग' में अक्षय की स्क्रिप्ट ने कोई मदद नहीं की, लिहाजा थोड़ी देर में ही फिल्म में हंसी का स्रोत सूख जाता है और 'सिंह इज़ ब्लिंग' अपनी चमक खो बैठती है। 
 
प्रभुदेवा ने अक्षय को लेकर 'राउडी राठौर' नामक एक्शन फिल्म बनाई थी और इस बार यह जोड़ी हास्य फिल्म लेकर आई है जो एक तरह से 'सिंह इज़ किंग' (2008) को ही घुमा-फिरा कर ही पेश कर दी गई है। अक्षय दोनों में सरदार के रोल में हैं और हीरोइन भी गोरी मेम है। सिंह इज़ किंग में वह कुछ सीखने ऑस्ट्रेलिया जाता हैं तो यहां पर गोआ। 
 
'सिंह इज़ ब्लिंग' में कहानी के नाम पर कुछ घिसेपिटे जोक्स और वो दृश्य हैं जिनका कहानी से कोई लेना-देना नहीं है। कुछ बार आपको ये हंसाते हैं, लेकिन ज्यादातर बोर करते हैं। फिल्म को अपने कंधे पर ढोने की अक्षय भरसक कोशिश करते हैं, लेकिन बिना प्लॉट की कहानी को भी वे कहां तक खींचते। पहले हाफ में आप सब कुछ भूल कर थोड़ा-बहुत कॉमेडी का मजा ले सकते हैं, लेकिन दूसरे हाफ में जैसे ही ड्रामा हावी होता है तो इंतजार फिल्म के खत्म होने का रहता है। 
पंजाब के गांव बस्सी पठाना में रहने वाला रफ्तार सिंह (अक्षय कुमार) हर काम अधूरा छोड़ता है, इसके लिए वह पिता की गालियां तो मां के परांठे-जलेबी खाता है। पिता धमकी देते है कि या तो वह गोआ जाए नहीं तो फिर एक मोटी लड़की से शादी करने को तैयार हो जाए, जिसे रफ्तार कुश्ती खेलने लायक मानता है। 
 
गोआ में रफ्तार अपने पिता के दोस्त के लिए काम करता है जो रोमानिया से आई अपने दोस्त की बेटी सारा (एमी जैक्सन) की देखभाल का जिम्मा रफ्तार को देते हैं। सारा को हिंदी नहीं आती और रफ्तार को अंग्रेजी। रफ्तार खट्टे नाम वाली अनुवादक एमली (लारा दत्ता) को रख लेता है। रफ्तार को एमली गुंडा समझ लेती है और अनुवाद में गड़बड़ी करती है जिससे सारा और रफ्तार एक-दूसरे को गलत समझते हैं। 
 
सारा एक डॉन की बेटी है और उसके पीछे रोमानिया में रहने वाला मार्क (केके मेनन) पड़ा हुआ है। मार्क के दबाव के कारण सारा उससे शादी करने के लिए राजी हो जाती है। रफ्तार उसके पीछे रोमानिया पहुंच जाता है। उठापटक के साथ फिल्म खत्म होती है। 
 
इस बेसिर पैर कहानी और स्क्रिप्ट को ग्रेजिंग गोट पिक्चर्स में काम करने वालों ने लिखा है जिनका नाम नहीं दिया गया है। इस कहानी पर अक्षय काम करने को और प्रभुदेवा निर्देशन के‍ लिए तैयार हो गए। स्क्रीन पर चल रह उटपटांग हरकतों के बीच एमी की मां वाला बोरियत से भरा ट्रेक भी झेलना पड़ता है जिसका कोई मतलब नहीं है। यह भी समझ नहीं आता कि जब एमली के आगे सारी बातें स्पष्ट हो गई है तो भी वह गलत अनुवाद क्यों कर रही है?  
 
चलिए, स्क्रिप्ट की बात छोड़ते हैं और कॉमेडी की बात करते हैं। हंसाने के नाम पर फिल्म के निर्देशक प्रभुदेवा भी एक सीन में लोगों पर सूसू करते नजर आए। रफ्तार के दोस्तों को एमली समुंदर किनारे ले जाती है और उनके प्राइवेट पार्ट पर नारियल मारती है। फिल्म की हीरोइन कार चेजिंग सीन में हीरो की गोद में बैठ सीढ़ियों पर कार चलाती है। अब क्या इसे कॉमेडी कहा जाए? ऐसे कई बेमतलब के दृश्यों के सहारे फिल्म को इतना खींचा है कि आपका धैर्य आपकी परीक्षा लेने लगता है। 
 
फिल्म का संगीत भी दमदार नहीं है। 'माही आजा' को छोड़ सारे गाने घटिया हैं। बैकग्राउंड म्युजिक के नाम पर 'चु चे' जैसी आवाजें सुनाई देती हैं। 
 
निर्देशक के रूप में प्रभुदेवा फिल्म को मनोरंजक नहीं बना पाए और लगातार घटिया फिल्में बना रहे हैं। उन्होंने फिल्म बनाने के लिए बहुत ही गलत कहानी चुनी और अक्षय कुमार के सामने उन्होंने सारी बातों को नजरअंदाज कर दिया। 
 
अक्षय कुमार ने अपना काम दिल लगा कर किया और स्क्रिप्ट से ऊपर उठकर उन्होंने काम किया। उनकी वजह से ही फिल्म में रूचि बनी रहती है, लेकिन अक्षय इससे बेहतर स्क्रिप्ट के हकदार हैं। 
 
को हीरो की तरह पेश किया गया है। कई दृश्यों में हीरो मार खाता है और फिर एमी गुंडों की ठुकाई करती हैं। स्टंट करते समय एमी बिलकुल विश्वसनीय लगती हैं। इमोशनल सीन में वे जरूर कमजोर रही हैं, लेकिन कुल मिलाकर उनका काम बेहतरीन है। लंबे बाल वाले केके मेनन 'आई एम टू गुड' बोलते रहे और लगातार वे एक जैसी भूमिकाएं कर रहे हैं। लारा दत्ता का रोल अजीब था और उतने ही अजीब तरीके से उन्होंने निभाया।  
 
कुल मिलाकर 'सिंह इज़ ब्लिंग' की चमक उम्मीद से कम है। 
 
बैनर : पेन इंडिया प्रा.लि., ग्रेजिंग गोट प्रोडक्शन्स
निर्माता : अश्विनी यार्डी 
निर्देशक : प्रभु देवा 
संगीत : साजिद-वाजिद, मीत ब्रदर्स अंजान, मंज मुसिक, स्नेहा खानवलकर, डीजे तेजस, डीजे नव एंड ढोली डीप 
कलाकार : अक्षय कुमार, एमी जैक्सन, लारा दत्ता, केके मेनन, योगराज सिंह, रति अग्निहोत्री, सनी लियोन (कैमियो) 
सेंसर सर्टिफिकेट : यूए * 2 घंटे 21 मिनट
रेटिंग : 2/5 



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