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Last Modified: रविवार, 4 जनवरी 2026 (12:03 IST)

दिल चाहता है से गली बॉय तक: एक्सेल एंटरटेनमेंट की फिल्मों ने बदली पूरे देश की सांस्कृतिक सोच

Farhan Akhtar
रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट ने यूनिवर्सल म्यूज़िक ग्रुप के साथ साझेदारी कर ग्लोबल स्तर पर कदम रखा है — यह किसी भी भारतीय प्रोडक्शन हाउस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। पिछले दो दशकों से ज़्यादा समय से एक्सेल एंटरटेनमेंट हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली प्रोडक्शन हाउस में से एक रहा है। 
 
फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी द्वारा स्थापित एक्सेल ने सिर्फ़ बॉक्स ऑफिस नंबरों के पीछे नहीं भागा, बल्कि पॉप कल्चर को नई दिशा दी, कहानी कहने के तरीके बदले और ऐसी फ़िल्में व शोज़ बनाए जो समय के साथ क्लासिक बन गए।
 
कमिंग-ऑफ-एज ड्रामा से लेकर ज़मीन से जुड़ी संघर्ष भरी कहानियों तक, एक्सेल की फ़िल्मों ने बार-बार बॉक्स ऑफिस पर सफलता पाई और दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। आइए नज़र डालते हैं उन एक्सेल एंटरटेनमेंट प्रोजेक्ट्स पर जिन्होंने थिएटर और चर्चाओं दोनों पर राज किया—
 

1. दिल चाहता है (2001)
हिंदी सिनेमा के लिए एक नई शुरुआत। दिल चाहता है ने शहरी युवाओं, दोस्ती और रिश्तों को पर्दे पर दिखाने का तरीका पूरी तरह बदल दिया। बॉक्स ऑफिस पर सफलता के साथ-साथ यह फ़िल्म एक कल्ट क्लासिक बनी और आज भी फिल्ममेकर्स के लिए एक बेंचमार्क मानी जाती है।
 
2. लक्ष्य (2004)
सिर्फ़ एक वॉर फ़िल्म नहीं, बल्कि आत्म-खोज और परिपक्व होने की यात्रा। लक्ष्य ने युवाओं से गहरा जुड़ाव बनाया। माउथ पब्लिसिटी के ज़रिए इसकी बॉक्स ऑफिस सफलता बढ़ी और भारतीय सेना की वास्तविक प्रस्तुति व मजबूत कहानी के लिए इसे लंबे समय तक सराहा गया।
 
3. ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा (2011)
यात्रा, दोस्ती, आत्म-खोज और कमर्शियल सफलता का बेहतरीन संगम। ZNMD ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और एक पूरी पीढ़ी के लिए लाइफ़स्टाइल फ़िल्म बन गई। इसके डायलॉग्स, संगीत और स्पेन रोड ट्रिप के सपने आज भी पॉप कल्चर का हिस्सा हैं।
 
4. गली बॉय (2019)
आधुनिक दौर की बड़ी बॉक्स ऑफिस हिट। गली बॉय ने भारत के अंडरग्राउंड रैप सीन को मेनस्ट्रीम बनाया। क्रिटिकल सराहना, ज़बरदस्त कमाई और अंतरराष्ट्रीय पहचान के साथ इस फ़िल्म ने साबित किया कि एक्सेल समय के साथ खुद को लगातार आगे बढ़ाता रहा है।
 
5. मिर्ज़ापुर
हालांकि मिर्ज़ापुर ने थिएटर के बजाय ओटीटी पर सफलता पाई, लेकिन इसका प्रभाव किसी भी बड़ी फ़िल्म से कम नहीं रहा। यह सीरीज़ पूरे देश में एक फिनॉमिना बनी और यह साबित किया कि एक्सेल की कहानी कहने की ताकत थिएटर से आगे भी उतनी ही प्रभावशाली है।
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