‘रक्त चरित्र’ से वापसी की उम्मीद

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रक्त चरित्र दो व्यक्तियों के करियर में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। ये हैं रामगोपाल वर्मा और विवेक ओबेरॉय। दोनों को उम्मीद है यह फिल्म उन्हें अपना खोया हुआ स्थान फिर दिला सकती है।

लगातार सफल फिल्म बनाने के बाद रामू ने इतनी सारी असफल फिल्में बना डाली कि अब लोग रामू की फिल्में देखना पसंद नहीं करते हैं। ऐसा लगता है कि रामू फिल्म बनाने की कला भूल चुके हैं।

रामू जैसा ही हाल है का, जिन्हें पहला मौका रामू ने ही दिया था। इन दोनों के डूबते करियर को ‘रक्त चरित्’ सहारा दे सकती है।
इस फिल्म को हिंदी, और तेलुगु में बनाया गया है। हिंदी और तेलुगु में यह दो भागों में बनाई गई है। फिल्म का दूसरा भाग कुछ सप्ताह बाद रिलीज होगा। जबकि तमिल में इस फिल्म की कहानी को एक ही भाग में पूरा किया गया है।

फिल्म में से जुड़े लोगों का कहना है कि फिल्म में हिंसा की भरमार है, लेकिन फिल्म बहुत असरदायक बनी है।



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