19 शहीदों के परिवार से क्या कहेंगे सलमान... अर्णब ने पूछा सवाल

पाकिस्तानी कलाकारों को भारतीय फिल्मों में काम करने देना चाहिए या नहीं, यह इस समय छिड़ी बड़ी बहस में से एक है। सलमान से भी इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने पाकिस्तानी कलाकारों का समर्थन किया। सलमान ने कहा कि पड़ोसी देश के कलाकार आतंकवादी नहीं हैं। कलाकार और आतंकवादियों में फर्क होता है। आतंकवादी बिना अनुमति लेकर आते हैं और कलाकार अनु‍मति लेकर। उन्हें वीजा भारतीय सरकार देती है। जब भारत सरकार उन्हें काम करने की अनुमति देती है तो फिर उन्हें कैसे रोका जा सकता है। हालांकि सलमान ने सर्जिकल स्ट्राइक को सही ठहराया है। सलमान के पाकिस्तानी कलाकारों के समर्थन में उतरने से शिवसेना और राज ठाकरे खासे नाराज है। शिवसेना का कहना है कि सलमान को सबक सिखाने की जरूरत है। 
 
पाकिस्तान चले जाएं सलमान : राज ठाकरे  
राज ठाकरे कहते हैं कि सलमान को पाकिस्तानी कलाकारों से इतना प्यार है तो उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए। उनके अनुसार सलमान पाकिस्तान में वर्क परमिट लेकर तो दिखाएं। राज ठाकरे पूछते हैं कि यदि जवान बॉर्डर छोड़ दे तो क्या सीमा पर जाकर लड़ेंगे? फिल्मों में नकली गोली खाकर खड़े हो जाना असली बात है, लेकिन सीमा पर जवान को असली गोली लगती है तो वह उठ नहीं पाता। टीवी चैनल टाइम्स नाऊ से बात करते हुए राज ठाकरे ने कहा- 'सलमान खान की ट्यूबलाइट फ्लिकर होती है। कलाकार की सरहद होती है जैसी बातें बेवकूफी भरी है। ये इसलिए ऐसी बातें करते हैं क्योंकि यह इनका धंधा है। पाकिस्तान में इनकी फिल्में चलती हैं और मुनाफा होता  है। हमारे जवान जो देश की सुरक्षा कर रहे हैं वे किसी के नौकर नहीं है। कल से तो कोई जवान बंदूक रख देगा कि मैं भी गुलाम अली की गजल सुनना चाहता हूं तो क्या चलेगा?  
 
अर्णब ने पूछे सवाल 
अर्णब के अनुसार पूरी दुनिया ने उड़ी आतंकी हमले का विरोध किया है, लेकिन भारत में काम कर रहे पाकिस्तानी कलाकारों ने इसकी निंदा करने से इनकार कर दिया है और इन्हीं कलाकारों का सलमान समर्थन कर रहे हैं। अर्णब ने अपने शो में निम्न प्रश्न पूछे हैं। 
 
प्रश्न 1- सलमान खान और पाकिस्तानी स्टार उन 19 शहीदों के परिवार से क्या कहेंगे जिन्होंने उड़ी आतंकी हमले में देश के लिए अपनी जिंदगी दे दी? 
प्रश्न 2- सलमान और पाकिस्तानी कलाकारों के समर्थकों कहना है कि पाक सितारों से उनकी सरकार के खिलाफ बोलने की उम्मीद करना अवास्तविक है, लेकिन क्या आतंक के खिलाफ उनके बोलने की उम्मीद करना अवास्तविक है?
प्रश्न 3- क्या हफीज़ सईद के खिलाफ भी इनके बोलने की उम्मीद करना गलत है?
प्रश्न 4 - क्या फवाद और अन्य पाकिस्तानी स्टार्स से ये उम्मीद करना भी गलत है कि वे जैशे मोहम्मद और हिज़बुल मुजाहिदीन के खिलाफ कुछ बोलें?  
प्रश्न 5- जैसे पाकिस्तानी सितारों ने पेशावर आतंकी हमले पर लंबा चौड़ा बयान जारी किया था, लेकिन भारतीय सैनिकों पर पाकिस्तानी आतंकियों के हमले पर एक शब्द भी नहीं बोला? क्यों? 
प्रश्न 6- अली ज़फर ने पेशावर में आतंकी हमले के पीड़ितों की याद में एक गाना रेकॉर्ड किया था, लेकिन उड़ी और पठानकोट में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के बारे में एक शब्द भी नहीं बोला? 
 
अर्णब से नाराज होकर मीता ने शो छोड़ा 
इन बातों को लेकर अर्णब ने अपने शो में बहस भी चलाई जिसमें फिल्म अभिनेत्री मीता वशिष्ठ को भी बुलाया गया। गहमागहमी इतनी बढ़ गई कि मीता माइक फेंक कर चली गईं। अर्णब उन्हें चुप रहने को कह रहे थे और मीता लगातार बोले चली जा रही थीं। शायद मीता को लग रहा था कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही है। 
 
बॉलीवुड में दो धड़े
पाकिस्तानी कलाकारों का बॉलीवुड में अरसे से विरोध हो रहा है। शिवसेना और मनसे की भी हमेशा कोशिश रही है कि पाकिस्तानी कलाकार या क्रिकेट खिलाड़ियों को भारत में काम नहीं मिले। यही वजह है कि आईपीएल में एक भी पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं है। फिल्मों में कलाकारों, संगीतकारों और गायकों को काम मिलता रहा है। बॉलीवुड का एक खेमा लगातार इस बात का विरोध करता आया है, इसके बावजूद इन कलाकारों को काम मिलता रहा है। 
 
उड़ी आतंकी हमले के बाद स्थिति में तेजी से परिवर्तन आया है। विरोध के स्वर मुखर हो गए हैं। मना करने के बावजूद जब पाकिस्तानी कलाकारों को फिल्मों में अवसर मिल रहे हैं तो अब फिल्म को प्रदर्शित न होने देने की धमकी दी गई है। इसका पहला असर 'ऐ दिल है मुश्किल' पर पड़ सकता है जो दिवाली पर प्रदर्शित हो रही है। फिल्म करोड़ों रुपये की लागत से बनी है और प्रदर्शित न होने पर नुकसान होना तय है। यही राज ठाकरे चाहते हैं ताकि भविष्य में पाकिस्तानी कलाकारों को कोई भी मौका नहीं दे। 
 
दूसरी ओर बॉलीवुड के दूसरे धड़े का कहना है कि फिल्म और खेल को राजनीति से दूर रखना चाहिए। कलाकारों की कोई सरहद नहीं होती। 



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