रमेश सिप्पी : फिर भड़के शोले

रमेश सिप्पी
समय ताम्रकर|
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रमेश सिप्पी इन दिनों कई अभिनेताओं से मिल रहे हैं और कहा जा रहा है कि वे लंबे अंतराल के बाद फिल्म निर्देशित करने के मूड में हैं। रमेश सिप्पी द्वारा निर्देशित आखिरी फिल्म थी जमाना दीवाना, जो उन्होंने 18 वर्ष पूर्व निर्देशित की थी। तब से अब तक फिल्म मेकिंग और दर्शकों की रूचि में बहुत अंतर आ गया है। पुराने दौर के रमेश सिप्पी वर्तमान दर्शकों को ध्यान में रखकर कैसी फिल्म बनाते हैं ये देखना दिलचस्प होगा। निर्देशन के मैदान से दूर रहने के बावजूद रमेश ने फिल्म जगत से किनारा नहीं किया। अपने बेटे रोहन सिप्पी के सहारे वे से जुड़े रहे।

रमेश सिप्पी को दुनिया ‘शोले’ जैसी फिल्म के निर्देशक के रूप में जानती है। 1975 में रमेश द्वारा बनाई गई शोले का नाम आज भी गर्व से लिया जाता है और इसे थ्री डी में परिवर्तित कर इसी वर्ष सितंबर में रिलीज किया जा रहा है।

शोले के अलावा भी रमेश ने कई बेहतरीन फिल्में बनाई हैं। अंदाज (1971), सीता और गीता (1972), शान (1980), शक्ति (1982), (1985) उनकी श्रेष्ठ फिल्में हैं और इनमें से ज्यादातर सफल भी रही हैं।
बड़े कलाकार उनकी फिल्मों की खासियत रहे हैं और वे उन चुनिंदा निर्देशकों में से हैं जिन्होंने बॉलीवुड के तीन सुपरस्टार्स दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान को निर्देशित किया है।

जब रमेश की फिल्में पिटने लगी तो उन्होंने टीवी के लिए बुनियाद धारावाहिक के कुछ एपिसोड निर्देशित किए। भ्रष्टाचार (1989), अकेला (1991) और जमाना दीवाना (1995) की असफलता ने रमेश को तोड़ कर रख दिया और उसके बाद उनकी फिल्म निर्देशित करने की हिम्मत नहीं हुई। कुछ वर्ष तक वे इंडस्ट्री से कटे रहे, लेकिन बेटे रोहन सिप्पी के सक्रिय होने के बाद पार्टियों में नजर आने लगे।
रमेश सिप्पी भी परफेक्शनिस्ट हैं। ऐसे लोगों का काम धीमी गति से होता है। उनकी फिल्मों में वापसी की खबरें पहले भी कई बार आईं, लेकिन महज अफवाह साबित हुई। कई बार सुनने में आया कि उनके साथ बड़े सितारे काम करने के इच्छुक नहीं है।

यह आश्चर्य की बात है कि शोले जैसी सफलतम फिल्म बनाने वाले निर्देशक को भी कलाकार मना कर देते हैं। दरअसल बॉलीवुड में आदमी की सफलता-असफलता उसकी आखिरी फिल्म देख कर ही तय की जाती है।
उम्मीद की जानी चाहिए कि रमेश को इस बार सितारे मना नहीं करेंगे और 65 वर्षीय यह निर्देशक अपनी वापसी कर सकेगा।

 

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