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''पथराव से फुटबॉल मैदान तक''

पथराव
BBC
18 साल का कश्मीरी युवक, इमरान, पिछले साल गर्मियों में पथराव करने के आरोप में जेल गया था। अब वो ब्राजील जा रहा है, फुटबॉल के कोच का प्रशिक्षण लेने।

ब्राजील में सबसे बड़ी और फुटबॉल की अंतरराष्ट्रीय संस्था फीफा से मान्यता प्राप्त, साओ पाअलो सॉकर कोचेज एसोसिएशन में वो एक महीना रहेगे। इमरान अपनी कामयाबी का सारा श्रेय अपने कोच जुआं मार्कोस त्रोइया को देते हैं।

उन्होंने बीबीसी को बताया, 'पिछले साल मुझे जेल में डाल दिया था, मैं पथराव नहीं कर रहा था, सिर्फ विरोध कर रहा था, लेकिन दो दिन जेल में रहा, मेरे कोच मुझे छुड़ाने नहीं आते तो मैं आज विदेश नहीं जा रहा होता।'

उसके खिलाफ अब भी कुछ मामले दर्ज हैं और वो सरकार से माफी की अपील करना चाहते हैं। वर्ष 2010 में घाटी में हिंसा का एक लंबा दौर चला, जिसमें सैकड़ों युवा पथराव के आरोप में जेल गए थे।

इमरान बताते हैं कि तब डॉक्टर, इंजीनीयर और छात्र, सभी ‘आजादी’ का नारा लगाने सड़कों पर निकल पड़ते थे। लेकिन वो कहते हैं, 'मैं फिर कभी विरोध नहीं करूंगा, एक इंसान से कुछ फर्क नहीं पड़ता, मेरी वजह से मेरे पिता को जेल में गिड़गिड़ाना पड़ा, अब मैं नई शुरुआत करना चाहता हूं।'

मां का सपना : इमरान के पिता मजदूरी करते हैं और मां घर का काम देखती हैं। एक भाई और एक बहन हैं। दोनों स्कूल में पढ़ रहे हैं। घर की माली हालत ठीक ना होने के बावजूद इमरान कहते हैं कि उनकी मां का सपना था कि वो फुटबॉल खेले। इसीलिए वो सात साल से मेहनत कर रहे हैं।

इमरान के मुताबिक वो जिला स्तर पर कई बार खेले, लेकिन तीन बार राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए क्वालिफाई करने के बावजूद चूक गए। खेलने के लिए जन्म प्रमाण-पत्र चाहिए था और पिता के अनपढ़ होने की वजह से उनके पास ये नहीं था।

अब ब्राजील जाने के लिए पासपोर्ट बना तो उसके लिए इमरान ने खुद ही जन्म प्रमाण-पत्र बनवाया। इमरान कहते हैं, 'कश्मीर के युवा में फुटबॉल का हुनर है, यहां क्रिकेट नहीं बल्कि सब फुटबॉल खेलना चाहते हैं, तो जो बेरोजगार लड़के हैं वो यही सीखना चाहते हैं।'

इमरान सिर्फ दसवीं पास हैं, लेकिन जहां से फुटबॉल सीखी, वहीं अब कोच के तौर पर काम कर रहे हैं। वो कहते हैं कि ब्राजील में प्रशिक्षण लेने के बाद वो ये काम जारी रखेगा ताकि कमाई होती रहे, साथ ही बतौर खिलाड़ी भी आगे बढ़ने की कोशिश करेगा।