dipawali
✕

आर्मीनिया-अज़रबैजान संघर्ष: तुर्की कैसे बन गया 'ड्रोन सुपर पॉवर'?

Written By BBC Hindi
Updated: शनिवार, 24 अक्टूबर 2020 (09:34 IST)
नागोर्नो-काराबाख़ में आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच चल रहे भीषण युद्ध ने तुर्की में बने लड़ाकू ड्रोन विमानों को भी दुनिया की नज़र में ला दिया है। कहा जा रहा है कि तुर्की से ख़रीदे गए ड्रोन की वजह से अज़रबैजान को युद्ध में बढ़त हासिल हुई है। नागोर्नो-काराबाख़ युद्ध शुरू होने से पहले ही तुर्की के ड्रोन विमानों की वजह से कई सैन्य विश्लेषक उसे ग्लोबल डिफेंस इंडस्ट्री क्षेत्र के शीर्ष देशों में शामिल करने लगे थे।
 
उन्नत लड़ाकू ड्रोन बना रहा तुर्की अपने आप को इसराइल या अमेरिका के साथ जोड़कर नहीं देखना चाहता है। वो उन्नत तकनीक के नए विमान ख़ुद बना रहा है। मानवरहित विमानों के अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञ डेनियल गेटिंगर ने बीबीसी तुर्की सेवा से कहा कि तुर्की कई तरह के ड्रोन विमान बना रहा है। हेबरतुर्क के पत्रकार और एविएशन के विशेषज्ञ गुंते सिमसेक का मानना है कि तुर्की कई बरसों से से उड्डयन क्षेत्र में हुए अपने नुकसान की भरपाई कर रहा है।'
 
वो बताते हैं कि विमान निर्माता तुर्की साल 1940 में ही सिविल एविएशन ऑर्गेनाइज़ेशन का सदस्य बन गया था। हालांकि, अगले कुछ वर्षों में तुर्की की स्थिति कमज़ोर होती गई। लेकिन अब मानवरहित विमान बनाकर उसने अपनी स्थिति मज़बूत कर ली है।
 
तुर्की की आलोचना
 
देश के भीतर ड्रोन हमलों और उनमें आम नागरिकों की मौत को लेकर तुर्की को आलोचना का सामना भी करना पड़ा है। अमेरिका के मिशेल एयरोस्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट से जुड़े डेनियल गेटिंगर कहते हैं कि यूएवी के मामले में दुनिया में सबसे आगे इसराइल और अमेरिका हैं। इसराइल और अमेरिका ने 1970 और 80 के दशक में सैन्य इस्तेमाल के लिए ड्रोन विमान बनाने की शुरुआत की थी। तुर्की इस क्षेत्र में नया निर्माता है। इसके अलावा चीन और फ़्रांस भी बड़े ड्रोन निर्माता देश हैं। गेटिंगर के मुताबिक इस समय दुनिया में कम से कम 95 देश ड्रोन विमान बनाने की कोशिश कर रहे हैं और कम से कम 60 देश 267 तरह के सैन्य ड्रोन का इस्तेमाल करते हैं।
 
सबसे ज़्यादा ड्रोन खरीदने वाला देश-चीन
 
गुंते सिमसेक के मुताबिक ड्रोन डिजाइन, सॉफ़्टवेयर और इस्तेमाल के मामले में तुर्की दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल है। ब्रिटेन स्थित गैर सरकारी संगठन ड्रोन वॉर्स के मुताबिक ड्रोन उत्पादन के क्षेत्र में शामिल होने वाला तुर्की नई पीढ़ी का देश है। इन देशों में चीन, ईरान और पाकिस्तान भी शामिल हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक़ बीते साल चीन के ड्रोन निर्यात में 1430% की वृद्धि हुई है और इस मामले में चीन सबसे आगे हो गया है। एयरोस्पेस और डिफ़ेंस के क्षेत्र में काम करने वाली शोध फर्म टील ग्रुप के मुताबिक साल 2019 में ड्रोन का कारोबार बढ़कर 7.3 अरब डॉलर का हो गया। अगले 10 साल में यह आंकड़ा 98.9 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
 
तुर्की की सेना अलगाववादी संगठन पीकेके के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर ड्रोन विमानों का इस्तेमाल करती है और इसी वजह से तुर्की में इनका उत्पादन बढ़ा है। तुर्की पीकेके को आतंकवादी संगठन मानता है। ये उन कुर्दों का संगठन है, जो तुर्की में कुर्दों के लिए अलग देश बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। तुर्की साल 2000 के बाद से इसराइल से ड्रोन ख़रीद रहा था लेकिन हेरोन टाइप यूएवी उड़ाने में उसे समस्याएं आ रही थीं। कभी वो क्रैश हो जा रहे थे कभी तकनीकी कारणों से उड़ नहीं पा रहे थे। इसी वजह से कुछ हेरोन ड्रोन वापस इसराइल भी भेज दिए गए थे।
 
अमेरिका की कांग्रेस ने भी प्रीडेटर और रीपर ड्रोन की तुर्की को बिक्री पर रोक लगा दी थी। इसके बाद अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए तुर्की को अपना ड्रोन कार्यक्रम विकसित करना पड़ा। बायकार कंपनी का बायरक्तार टीबी2 ड्रोन दुनिया के सबसे चर्चित ड्रोन विमानों में शामिल है। ये अपने प्रतिद्वंदियों से इसलिए बेहतर है, क्योंकि ये मिसाइल ले जाने में सक्षम सबसे छोटा ड्रोन है। इसका इस्तेमाल हवाई क्षेत्र की निगरानी और जासूसी के लिए भी किया जा सकता है। ये सटीक निशाना भी लगाता है।
 
किन देशों के पास है ये ड्रोन?

तुर्की और अज़रबैजान के मीडिया में इस साल गर्मियों में इस ड्रोन को ख़रीदने की ख़बरें आने लगीं थीं। इसके अलावा सर्बिया, क़तर, ट्यूनीशिया और लीबिया भी तुर्की में बनें मानवरहित विमान ख़रीद चुके हैं। नागोर्नो काराबाख़ की लड़ाई में बायरक्तार टीबी2 ड्रोन विमानों के कामयाब इस्तेमाल ने इनकी मांग भी बढ़ा दी है। गुंते सिमसेक कहते हैं कि अब इस ड्रोन का बाज़ार बढ़ा हो गया है।
 
फ्रांस24 के साथ एक साक्षात्कार में अज़रबैजान के राष्ट्रपति से जब पूछा गया कि उन्होंने तुर्की से कितने ड्रोन लिए हैं तो इसके जवाब में उन्होंने कहा था कि 'हमारे पास अपना मक़सद हासिल करने के लिए पर्याप्त ड्रोन विमान हैं।' राष्ट्रपति इल्हाम अलियेव ने कहा था, 'ये वो जानकारी है जिसे मैं सार्वजनिक नहीं करना चाहूंगा।'
 
अज़रबैजान के राष्ट्रपति ने युद्ध पर ड्रोन के प्रभाव से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए कहा था, 'ज़ाहिर तौर पर ये नए ज़माने के उन्नत हथियार हैं। मैं ये कह सकता हूं कि तुर्की से मिले ड्रोन विमानों से हमने आर्मीनिया के एक अरब डॉलर से अधिक सैन्य साज़ो-सामान बर्बाद कर दिए हैं।' तुर्की ने सीरिया में चलाए ऑपरेशन स्प्रिंग शील्ड के दौरान भी अपने ड्रोन विमानों का इस्तेमाल किया था।
 
तुर्की के ड्रोन विमानों की मदद से ही लीबिया की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार विद्रोही सैन्य नेता ख़लीफ़ा हफ़्तार के बलों के ख़िलाफ़ प्रभावी कार्रवाई कर पाई थी। साल 2019 में तुर्की ने 2.74 अरब डॉलर के हथियार बेचे। पिछले साल के मुकाबले तुर्की ने 34 प्रतिशत की बढ़त हासिल की। विशेषज्ञों के मुताबिक साल 2023 तक तुर्की का ड्रोन कारोबार 10 अरब डॉलर तक बढ़ जाएगा।
 
स्टॉकहोम पीस इंस्टीट्यूट के मुताबिक साल 2014-18 के बीच तुर्की ने हथियारों की बिक्री 170% बढ़ाई जबकि साल 2015-19 के बीच तुर्की के हथियारों के आयात में 48% की कमी आई। इसकी वजहों में तुर्की का स्थानीय तकनीक विकसित करना और विदेशों से हथियार ख़रीदने में आ रही दिक्कतें शामिल हैं। डेनियल गेटिंगर कहते हैं कि तुर्की सिर्फ़ हथियार बेचना में ही दिलचस्पी नहीं ले रहा है बल्कि वो दूसरे देशों से रिश्ते भी बनाना चाहता है।
 
वो कहते हैं कि तुर्की ड्रोन के उत्पादन के मामलों में दूसरे देशों को सहयोग भी दे रहा है। गेटिंगर के अनुसार, बायरक्तार ड्रोन टीबी2 वर्ज़न से कुछ सस्ता है और तुर्की ने इसकी बिक्री के लिए ख़ूब प्रचार भी किया है।
 
तुर्की के ड्रोन विमानों की एक ख़ास बात ये है कि इन्हें पूरी तरह से स्थानीय स्तर पर बनाया गया है। ड्रोन निर्माता कंपनी बायकार ने एक बयान में कहा है कि उसका पूरा सिस्टम स्थानीय और घरेलू उत्पादन पर ही आधारित है। हालांकि विशेषज्ञ इससे अलग राय रखते हैं। डेनियल गेटिंगर कहते हैं कि तुर्की सेंसर डिवाइस और टार्गेट डिवाइस जर्मनी और कनाडा से हासिल करता है। रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक तुर्की के ड्रोन कार्यक्रम की एक कमज़ोर कड़ी ये है कि ये आयात पर निर्भर है।
 
साल 2019 में ब्रितानी अख़बार 'द गॉर्जियन' ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि तुर्की का बायरक्तार टीबी2 ड्रोन हॉर्नेट टाइप के मिसाइल लांचरों का इस्तेमाल करता है जिन्हें ब्रितानी कंपनी ईडीओ एमबीएम टेक्नोलॉजी ने बनाया है। हालांकि बायकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। रिपोर्टों के मुताबिक जर्मनी की कंपनियों ने 1.28 करोड़ यूरो के सैन्य उपकरण तुर्की को बेचे थे जिनका इस्तेमाल ड्रोन बनाने में हो सकता है।
 
गुंते सिमसेक का कहना है कि तुर्की ने ड्रोन विमान का इंजन बनाने में प्रगति की है और ये एक बेहद विवादित मुद्दा है। ड्रोन वॉर्स से जुड़े सेमुएल ब्राउनसोर्ड के मुताबिक तुर्की के पास अपने ड्रोन विमानों के विकास और निर्यात का मौका है। इस क्षेत्र में तुर्की की कामयाबी की सबसे बड़ी वजह ये है कि वो दुनिया के ऐसे चंद देशों में शामिल है, जो अपनी ही ज़मीन पर ड्रोन विमानों से हमले कर रहे हैं।
 
सेमुएल ब्राउनसोर्ड ने एक लेख में ये भी कहा है कि तुर्की अपनी सीमाओं के भीतर इन ड्रोन विमानों का नियमित इस्तेमाल करता है। मानवाधिकार संगठन और कार्यकर्ता आरोप लगाते रहे हैं कि तुर्की अपने ही देश में ड्रोन विमानों का इस्तेमाल कर आम नागरिकों को निशाना बना रहा है। संगठनों का आरोप है कि तुर्की ने उत्तरी सीरिया में भी ड्रोन विमान इस्तेमाल किए।
 
ड्रोन विमानों की एक आलोचना इस बात को लेकर भी होती है कि इनके इस्तेमाल का एक ही नतीजा होता है- लोगों की मौत। सेमुएल ब्राउनसोर्ड कहते हैं, 'ड्रोन विमान से किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाता। जब ये इस्तेमाल होते हैं तो मौत निश्चित नतीजा होती है। ये एक गंभीर चिंता की बात है।'

Show comments

Tata Punch EV और Nexon EV को कड़ी टक्कर देगी Hyundai की सस्ती EV कार, जानिए कितनी मिलेगी रेंज

PM Kisan 24th Installment : किसानों के खाते में आ गए ₹2,000, पीएम मोदी ने जारी की 19 हजार करोड़ रुपये की किस्त, ऐसे चेक करें अपना स्टेटस

Samsung W27 : धमाका करने आया सैमसंग का सस्ता स्मार्टफोन, कंपनियों के छूटे पसीने

IDBI Bank Privatization : निर्मला सीतारमण का राहुल गांधी पर पलटवार, कांग्रेस राज के बैंक घोटालों की खोली पोल

क्यों गिर रहे सोने-चांदी के भाव? रिकॉर्ड हाई से गोल्ड 51000 सस्ता, सिल्वर 2.33 लाख से अधिक टूटी, क्या खरीदारी का यही है सही मौका या करें इंतजार?

सभी देखें

Samsung W27 : धमाका करने आया सैमसंग का सस्ता स्मार्टफोन, कंपनियों के छूटे पसीने

सस्ते फोन से Motorola करने वाला है धमाका, मिल सकती है 7,000mAh बैटरी, 144Hz डिस्प्ले और 50MP कैमरा

Apple iPhone Duo की प्री-बुकिंग शुरू, Samsung Galaxy Z Fold 8 को मिला फायदा, कीमत 2.99 लाख रुपए

iQOO Pad Pro 8.8 Launch : 9,020mAh बैटरी, एक्टिव कूलिंग फैन और 165Hz OLED डिस्प्ले से होगा लैस

iPhone खरीदने का शानदार मौका, Reliance Digital का बड़ा ऑफर, iPhone 15, 16 और 17 पर भारी छूट

अगला लेख