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कनाडा के चुनाव में सबसे ज़रूरी सात बातें

Updated: मंगलवार, 22 अक्टूबर 2019 (10:25 IST)
जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी के सत्ता में 4 साल होने पर कनाडा में सोमवार (21 अक्टूबर) को फिर चुनाव हुए। लेकिन इस बार चीज़ें उतनी स्पष्ट नहीं हैं, क्योंकि इस बार कई अन्य पार्टियां चुनाव मैदान में हैं। चलिए एक नज़र डालते हैं, कनाडा के कुछ उन मुख्य मुद्दों और परिदृश्यों पर, जो चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकती हैं।
 
दांव पर क्या है?
 
चुनाव प्रचार अभियान में जितनी अहमियत नेताओं की रही, उतनी ही इस बात की भी कि अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा? क्षेत्रफल के हिसाब से कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, हालांकि यहां की आबादी महज 3.50 करोड़ के क़रीब ही है। ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली से समानता वाले हाउस ऑफ़ कॉमन्स यानी कनाडा की संसद में कुल 338 सीटें हैं।
 
दो तरह की स्थिति है- एक बहुमत की सरकार और दूसरी त्रिशंकू यानी अल्पमत की सरकार। अगर एक पार्टी 170 सीटें जीतने में कामयाब हो जाती है तो कनाडा में बहुमत की सरकार होगी। जुलाई 2015 में जस्टिन ट्रूडो और उनके लिबरल उम्मीदवारों ने 184 सीटें जीती थीं यानी उन्हें एक शानदार बहुमत मिली थी।
 
हालांकि अल्पमत में भी सरकार बनी सकती है, लेकिन संसद में किसी भी विधेयक को पारित करने की स्थिति पाने यानी बहुमत के लिए उसे दूसरी पार्टियों का सहारा लेना पड़ता है।
 
महिला उम्मीदवारों की रिकॉर्ड संख्या
 
इस बार चुनाव में बड़ी संख्या में महिलाएं मैदान में हैं। सभी दलों को मिलाकर चुनाव में 651 महिला उम्मीदवार हैं। इक्वल वॉयस कनाडा के मुताबिक 2015 की तुलना में इसमें 9 फ़ीसदी की इजाफा हुआ है। इक्वल वॉयस ने कहा कि इसमें 'भारी उछाल' देखने को मिला है। इक्वल वॉयस ने एक बयान में बताया, 'अगर चुनाव के इतिहास में अब तक जीतीं सभी महिलाओं को जोड़ लें, तो भी ये एकसाथ संसद की 338 सीटों को नहीं भर सकतीं।' 
 
जलवायु परिवर्तन इस बार अहम मुद्दा
 
मतदाता जलवायु परिवर्तन को लेकर अपेक्षाकृत चिंतित दिखे। कनाडा के मतदाताओं के लिए स्वास्थ्य एक हमेशा से चला आ रहा बेहद अहम मुद्दा है। लेकिन इस बार जलवायु परिवर्तन का मुद्दा कहीं अधिक गरम है। 2015 में ट्रूडो ने जो पेरिस समझौता किया था उसके नतीजों को भी मतदाता ज़रूर परखेंगे। अल्बर्टा से ब्रिटिश कोलंबिया तक कच्चा तेल लाने की क्षमता को तीन गुना तक बढ़ाने के लिए ट्रूडो की लिबरल पार्टी सरकार का ट्रांस माउंटेन पाइप लाइन को ख़रीदने के फ़ैसले को भी आलोचना का सामना करना पड़ा है। घरों की कीमतें बढ़ी हैं और इनकम बढ़ने की रफ़्तार सुस्त हुई हैं।
 
आर्थिक भविष्य को लेकर चिंता
 
बेरोज़गारी दर कम और अर्थव्यवस्था की स्थिति सामान्य होने के बावजूद कनाडा के लोग अपने आर्थिक भविष्य को लेकर चिंतित हैं। जीवन-यापन पर किया जाने वाले खर्च को इस चुनाव प्रचार में बहुत अहमियत मिली और सभी दलों ने कनाडा के लोगों की ज़िंदगी और आसान बनाने की अपनी अपनी नीतियां सामने रखीं। इसमें करों में रियायत से लेकर ख़ासकर टोरंटो और वैंकुवर में पहली बार घर ख़रीदना आसान बनाने तक की योजनाएं शामिल हैं।
 
किन इलाक़ों पर नज़र
 
आने वाले नतीजों पर ये 3 क्षेत्र असर डाल सकते हैं- क्यूबेक, द ग्रेटर टोरंटो एरिया औरप लोअर मेनलैंड ब्रिटिश कोलंबिया। कुबेक की बात करते हैं, जहां हाल के वर्षों में वोट अस्थिर रहा है। इस बार भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। ब्लॉक केबेक्वा नाम की पार्टी सिर्फ़ इसी प्रांत में उम्मीदवार खड़ा करती है। चुनाव अभियान के अंतिम दिनों में पार्टी ने कुबेक की संप्रभुता का मुद्दा उठाया। ये पार्टी दूसरे नंबर पर है और लिबरल पार्टी क लिए मुश्किल बनी हुई है।
 
लोगों तक पहुंचने में मुश्किल
 
कनाडा एक विशाल राष्ट्र है जिसमें बड़े-बड़े जंगल हैं। इससे घर-घर जाकर चुनाव प्रचार करने में दिक्कत आती है। भौगोलिक दृष्टि से कनाडा का सबसे बड़ा इलाक़ा नूनावूत अकेला ही ब्रिटेन जैसे 7 देशों के बराबर है। इसके उलट कोई उम्मीदवार सबसे छोटे क्षेत्र टोरंटो सेंटर में बहुत आसानी से लोगों तक पहुंच सकता है।

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