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नेपाल में शी जिनपिंग ने क्यों दी हड्डी-पसली तोड़ने की चेतावनी

Written By BBC Hindi
Updated: सोमवार, 14 अक्टूबर 2019 (10:58 IST)
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेपाल में कठोर चेतावनी देते हुए कहा है कि चीन को तोड़ने की कोई कोशिश हुई तो वो हड्डी-पसली तोड़ देगा। चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के अनुसार राष्ट्रपति जिनपिंग की यह चेतावनी नेपाल दौरे पर आई है।
 
नेपाल में ही राष्ट्रपति जिनपिंग ने काफ़ी सख़्त भाषा में कहा कि चीन में किसी ने आज़ादी की वकालत की तो उसका कचूमर निकाल दिया जाएगा। नेपाल के नेताओं से बातचीत के दौरान जिनपिंग ने कहा, 'अगर चीन के किसी भी हिस्से में मुल्क को बांटने की कोशिश की तो उसकी हड्डियां तोड़ दी जाएंगी। किसी बाहरी ताक़त ने ऐसी कोशिशों का समर्थन किया वो चीन की नज़र में दिन में सपने देखने वाले लोग हैं।'
 
चीन के राष्ट्रपति की इस कड़ी चेतावनी को कई संदर्भों में देखा जा रहा है। नेपाल में तिब्बत की आज़ादी के समर्थन में कुछ तिब्बती एक्टिविस्ट राष्ट्रपति जिनपिंग के दौरे का विरोध कर रहे थे। इन प्रदर्शनकारियों पर नेपाल सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। शी जिनपिंग के इस बयान को इससे भी जोड़कर देखा जा रहा है। इसके साथ ही हांगकांग में पिछले चार महीनों से जारी विरोध प्रदर्शन से भी जिनपिंग के बयान को जोड़ा जा रहा है।
 
रविवार को हांगकांग में कई शांतिपूर्ण रैलियां निकाली गईं और इस दौरान पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़पें भी हुईं। इस विरोध-प्रदर्शन में पुलिस ट्रांसपोर्ट स्टेशन और चीन समर्थित दुकानों को नुक़सान पहुंचा है।
 
प्रदर्शनकारियों की रैलियों के कारण हांगकांग मेट्रो के 27 स्टेशन बंद रहे। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए हल्के बल का प्रयोग किया गया लेकिन टेलीविज़न फुटेज में दिख रहा है कि वीकेंड पर ख़रीदारी करने निकले लोग भगदड़ में फंसे हुए थे। कई लोग तो परेशान और रोते हुए दिखे। शॉपिंग सेंटर पर कई लोग ज़ख़्मी भी हुए।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार पुलिस ने एक शॉपिंग से मॉल से प्रदर्शनकारियों के समर्थन में नारे लगा रहे लोगों पर बल का प्रयोग किया। प्रशासन का कहना है कि मॉन्ग कोक पुलिस स्टेशन पर पेट्रोल बम फेंका गया और एक पुलिस अधिकारी की गर्दन पर चीरा लग गया। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार पुलिस अधिकारी की हालत स्थिर है। प्रदर्शनकारियों में ज़्यादातर युवा थे और अलग-अलग इलाक़ों में झुंड में बंटे थे।
 
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से शी यिहोंग नाम के एक ऐकेडमिक ने कहा, 'हांगकांग की वर्तमान स्थिति काफ़ी गंभीर है। यह चेतावनी अमेरिका और उन सभी के लिए है, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हांगकांग में जारी अतिवादियों की हिंसा के पक्ष में खड़े हैं। राष्ट्रपति जिनपिंग ने न केवल चीन का रुख़ साफ़ किया है बल्कि अमरीका को भी चेतावनी है कि वो चीन के आंतरिक मामलों से दूर रहे।'
 
हाल ही में रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर टेड क्रूज़ ने हांगकांग में चीन के रुख़ की आलोचना की थी और चीन को क्षेत्रीय शांति के लिए ख़तरा बताया था।
 
चीन-नेपाल आए और क़रीब
 
शी जिनपिंग के नेपाल दौरे में दोनों देशों के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों पर सहमति बनी है। चीन, नेपाल में कई इन्फ़्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम करेगा। दोनों देशों के साझा बयान में कहा गया है, 'नेपाल और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंध अब नए दौर में पहुंच गए हैं। दोनों देश एक-दूसरे की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय एकता का सम्मान करेंगे।'
 
नेपाल ने भी वन चाइना पॉलिसी को लेकर प्रतिबद्धता जताई। नेपाल ने कहा कि ताईवान चीन का अविभाज्य अंग है। नेपाल ने ये भी कहा कि तिब्बत का मामला चीन का आंतरिक मामला है। इसके साथ ही नेपाल ने चीन को आश्वस्त किया कि वो अपनी धरती से चीन विरोधी गतिविधियां नहीं चलने देगा।
 
शी जिनपिंग को नेपाल के त्रिभुवन एयरपोर्ट से विदा करने के बाद प्रधानमंत्री केपी ओली ने ट्वीट कर कहा कि इस दौरे से दोनों देशों के संबंध नई ऊंचाई पर पहुंच गए हैं।
 
नेपाल ने चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना वन बेल्ट वन रोड का भी समर्थन किया, हालांकि भारत इस परियोजना के ख़िलाफ़ है। साझा बयान में नेपाल और चीन को रणनीतिक पार्टनर बताया गया है। चीन और नेपाल के बीच कुल 20 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। दोनों देशों में इस बात पर भी सहमति बनी है कि चीन, नेपाल में अपने बैंकों का ब्रांच खोलेगा। दोनों देशों में प्रत्यर्पण संधि पर भी बात हो रही है, हालांकि इस संधि को लेकर विवाद है।
 
भारत भी नेपाल से प्रत्यर्पण संधि करना चाहता है लेकिन अभी तक नहीं हो पाया है। भारत और नेपाल के बीच 2 अक्टूबर 1953 में इस तरह की संधि हुई थी लेकिन भारत इसमें संशोधन चाहता है। इस संशोधन की कोशिश 2008 और 2010 में भी हुई थी लेकिन अब तक लटका ही है।
 
चीनी अख़बार 'ग्लोबल टाइम्स' ने लिखा है कि नेपाल पर अमेरिका के नेतृत्व वाले यूएस इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटिजी में शामिल होने का दबाव है। अख़बार के मुताबिक नेपाल ने चीन को आश्वस्त किया है कि वो ऐसे किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं होगा जिससे चीन की संप्रभुता पर सवाल खड़ा होता है।
 
हांगकांग पर विवाद क्यों
 
साल 1997 में जब हांगकांग को चीन के हवाले किया गया था तब बीजिंग ने 'एक देश-दो व्यवस्था' की अवधारणा के तहत कम से कम 2047 तक लोगों की स्वतंत्रता और अपनी क़ानूनी व्यवस्था को बनाए रखने की गारंटी दी थी। साल 2014 में हांगकांग में 79 दिनों तक चले 'अम्ब्रेला मूवमेंट' के बाद लोकतंत्र का समर्थन करने वालों पर चीनी सरकार कार्रवाई करने लगी थी। इस आंदोलन के दौरान चीन से कोई सहमति नहीं बन पाई थी।
 
विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों को जेल में डाल दिया गया था। आज़ादी का समर्थन करने वाली एक पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया और उस पार्टी के संस्थापक से इंटरव्यू करने पर एक विदेशी पत्रकार को वहां से निकाल दिया गया था। हांगकांग में अमरीकी चैंबर ऑफ कॉमर्स के अलावा अमरीका ने प्रस्तावित संशोधन पर गहरी चिंता व्यक्त की है और कहा है कि वहां रहने वाले उनके नागरिकों और व्यावसायिक हितों पर इसका ग़लत असर पड़ेगा।
 
साल 2003 में भी राष्ट्रीय सुरक्षा पर लाए गए क़ानून के विरोध में प्रदर्शन हुए थे। उस समय चीन को पीछे हटना पड़ा था। हालांकि अभी के वक़्त में बीजिंग की पकड़ हांगकांग पर कहीं अधिक मज़बूत है। 2014 में लोकतंत्र के समर्थन में हुए प्रदर्शन के बाद चीन का दबदबा दुनियाभर में बढ़ा है। इसकी अर्थव्यवस्था तेज़ी से मज़बूत हुई है।

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