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कश्मीर से धारा 35-ए हटी तो क्या हो जाएगा?
कश्मीर से धारा 35-ए को रद्द नहीं किया गया है, फिर भी उसे लेकर छिड़ा बवाल इस बात का संकेत है कि यदि इस धारा को खत्म किया ... -
…जायज था नीतीश के ‘डीएनए’ पर मोदी का सवाल?
बिहार के सीएम नीतीश कुमार को बिहार विधानसभा में बहुमत मिल गया। 131 विधायकों ने उनके समर्थन में वोट किया। आनन-फानन में ... -
क्या हिंसक भीड़ 'आका' की बात नहीं मानती?
यह वही भीड़ है, जो चुनाव के वक्त भाजपा प्रत्याशियों के लिए वोट जुटाने का काम करती है। चुनाव खत्म होते ही इनके कंधे पर ... -
सीमा पर संघर्ष, राज्यों में रार, जश्न में सरकार!
26 मई को केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के तीन वर्ष पूरे हो गए। इस दरम्यान सरकार ने क्या खोया और क्या पाया, यह अलग ... -
मैनचेस्टर ब्लास्ट अप्रत्याशित नहीं, चिन्तनीय
ब्रिटेन के उत्तरी शहर मैनचेस्टर स्थित एक म्यूज़िक कंसर्ट में हुआ बम धमाका अप्रत्याशित जैसा प्रतीत नहीं हो रहा है है, ... -
विपक्षियों के ठिकानों पर छापों की 'सियासत'!
केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार 26 मई को तीन वर्ष पूरे करने वाली है। स्वाभाविक है, सत्ताधारी दल से संबंधित लोग जश्न ... -
लोकपाल के मुद्दे पर केन्द्र का रुख कितना जायज?
सुप्रीम कोर्ट ने 27 अप्रैल को कहा था कि साल 2013 का लोकपाल और लोकायुक्त कानून व्यवहारिक है और इसका क्रियान्वयन लटकाकर ... -
कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की उम्मीद!
हिंसा से सुलगते जम्मू-कश्मीर के हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं। राज्य के हालात की वजह से बीजेपी-पीडीपी गठबंधन ... -
दिल्ली सरकार के प्रचार पर ‘प्रहार’ के मायने
पता नहीं क्यों नेताओं को प्रचार की भूख खत्म क्यों नहीं होती? स्वाभाविक है, इस प्रचार की भूख की वजह से जनता के पैसे का ... -
राहुल गांधी की आक्रामकता से क्यों डरें, कैसे लड़ें?
आमतौर पर कहा जाता है, 'जैसी करनी, वैसी भरनी।' कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी का आक्रामक तेवर केन्द्र सत्ताधारी भाजपा ... -
हिन्दूवाद की उर्वर भूमि पर कौमी एकता की फसल!
मध्यम दर्जे के एक ब्रिटिश लेखक डेविड प्रिंसिज ने हाल ही में प्रकाशित अपनी एक पुस्तक ‘रिलिजियस डेमोक्रेसी’ में लिखा है ... -
सपा ही नहीं, ससपा में भी दम, मत आंकिए कम!
छोटे और कमजोर लोगों के लिए आमतौर पर गांवों में एक कहावत कही जाती है- ‘देखन में छोटन लगे, घाव करे गंभीर।’ कुछ इसी तरह की ... -
काबिल-ए-तारीफ है सियासत में यह सादगी!
देश किस दौर से गुजर रहा है? इस सवाल का जवाब कुछ भी देना खतरा से खाली नहीं है। 9 नवंबर 2016 से हर कोई औंधे मुंह दौड़ रहा ... -
गोरक्षकों पर मोदी एवं भागवत की मतभिन्नता क्यों?
गोरक्षकों की कार्यशैली पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के बयान ... -
...क्या गम है जिसको छुपा रहे हो?
‘तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या गम है जिसको छुपा रहे हो?’ याद तो होगा ही। वर्ष 1983 में एक फिल्म आई थी ‘अर्थ’। उसी ... -
कांग्रेस की 'खाट लूट' का सियासी कनेक्शन
भारतीय राजनीति में नए-नवेले प्रयोग और ग्लैमर का तड़का कोई नहीं बात नहीं है। इन सबके बावजूद लीक से हटकर कुछ अलग सोचने ... -
अंग्रेजियत की बेड़ियों से कब तक बंधी रहेगी हिन्दी?
आज 14 सितंबर यानी हिन्दी दिवस है। इस अवसर पर एक दिवसीय सभाएं, गोष्ठियां, वाद-विवाद आदि होंगे और फिर एक वर्ष तक का ...
