शनि अमावस्या : 4 दिसंबर 2021 को शनिदेव को कैसे करें प्रसन्न, 20 छोटे उपाय

पुनः संशोधित शुक्रवार, 3 दिसंबर 2021 (11:27 IST)
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Shani Amavasya : शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित है। 4 दिसंबर को शनिवार के दिन अमावस्या है और इसी दिन वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण भी है। आओ जानते हैं शनिदेव को प्रसन्न करने के 20 छोटे-छोटे उपाय।


1. स्नान : इस तिथि पर नदी में स्नान करने का खासा महत्व रहता है। गंगा में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

2. तर्पण : शास्त्रों के अनुसार अमावस्या की तिथि को पितर देवताओं की तिथि मानी जाती है। स्ना के बाद पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण व श्राद्ध भी किया जाता है। इससे जीवन में सुख और शांति मिलती है। इससे पितृदोष भी समाप्त हो जाता है।
3. दरिद्रों की सेना : अमावस्या पर गरीबों को दान दिया जाता है। इस दिन दान करने से विशेष पुण्य लाभ मिलता है। शनि को दरिद्रों के नारायण भी कहते हैं इसलिए दरिद्रों की सेवा से भी शनि प्रसन्न होते हैं।

4. छाता करें दान : असाध्य रोगों से ग्रस्त व्यक्ति को काला छाता, चमडे के जूते चप्पल पहनाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं।
5. अंधों को खिलाएं भोजन : अंधे-अपंगों, सेवकों और सफाईकर्मियों की सेवा करें। इस दिन खासकर 10 अंधों को भोजन कराने से शनिदेव प्रसन्न होंगे।

6. मंदिर में करें दान : शनि मंदिर में शनिवार के दिन तिल, उड़द, लोहा, तेल, काला वस्त्र, छाता और जूता दान देना चाहिए। प्राचीन काल में लोग भैंस, और काली गौ भी दान करते थे।

7. भैरव पूजा : इस नि भगवान भैरव को कच्चा दूध या शराब चढ़ाएं। इससे शनि संबंधी दोष दूर हो जाते हैं।
8. छाया दान : इस दिन स्टील या लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें और उसे शाम को शनि मंदिर में कटोरी सहित दान कर दें। शनिवार को तेल मालिश कर नहाना चाहिए।

9. वृद्धों की सेवा करें : शनि देव को वृद्धावस्था का स्वामी कहा गया है, जिस घर में माता पिता व वृद्धजनों का सम्मान होता है उस घर से शनि देव बहुत प्रसन्न होते हैं तथा जिस घर में वृद्ध का अपमान होता है उस घर से खुशहाली दूर भागती है।
10. कौवे को रोटी खिलाएं : शनिदेव का एक वाहन कौवा भी है। कौवा पितरों का प्रतीक भी है। इस दिन कौवे को रोटी खिलाने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
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11. हनुमान पूजा : शनि से उत्पन्न भीषण समस्या के लिए भगवान भोलेनाथ व हनुमान जी की पूजा एक साथ करनी चाहिए।
12. व्रत : मान्यता अनुसार शनि दोष, साढ़ेसाती या ढैय्या से पीड़ित जातक यदि इस दिन व्रत रखकर शनि देव की पूजा करते हो तो शनि के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

13. पीपल पूजा : मान्यता अनुसार शनि देव के दुष्प्रभाव से बचने के लिए शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से शनिदोष खत्म होता है।

14. शमी पूजा : मान्यता अनुसार शनि दोष से छुटकारा पाने के लिए शमी के वृक्ष की पूजा का भी प्रचलन है। शनिवार के दिन शाम को शमी के पेड़ के पास दीपक जलाने से लाभ मिलता।
15. काला धागा बांधे : शनि मंदिर से शनि रक्षा कवच या काला धागा हाथ में बांधने से भी सभी तरह की बाधा दूर होती है।

16. शनि भोग : शनिदेव को उड़द की दाल और बूंदी के लड्डू बहुत प्रिय है अत: शनिवार को लड्डू का भोग लगाकर बांटना चाहिए।

17. तेल दान : शनिवार के दिन शनि मंदिर में जाकर शनि महाराज की मूर्ति पर तेल अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं।

18. तेल मालिश : शनिवार के दिन संपूर्ण शरीर पर तेल मालिश कर नहाना चाहिए इससे भी शनि दोष दूर होते हैं।
19. काली गाय : काली गाय, जिस पर कोई दूसरा निशान न हो, का पूजन कर 8 बूंदी के लड्डू खिलाकर उसकी परिक्रमा करें तथा उसकी पूंछ से अपने सिर को 8 बार झाड़ दें।

20. कुत्ते को रोटी खिलाएं : काले कुत्ते को तेल या घी लगाकर रोटी खिलाएं।

शनि जाप : शनि मंदिर में बैठकर 'ॐ शं शनिश्चराय नम:' का जाप करना चाहिए या शनि चालीसा का पाठ करें।

शनिदेव पूजा के मंत्र :
गायत्री मंत्र :
ओम शनैश्चराय विदमहे सूर्यापुत्राय धीमहि।। तन्नो मंद: प्रचोदयात।।
या... ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्।
या... ऊं कृष्णांगाय विद्महे रविपुत्राय धीमहि तन्न: सौरि: प्रचोदयात।

एकाक्षरी मंत्र : मंत्र - ऊँ शं शनैश्चाराय नमः। सामान्य पूजा के दौरान इसी मंत्र को पढ़ना चाहिए।

शनिदेवजी का तांत्रिक मंत्र : ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः।
शनि देव महाराज के वैदिक मंत्र : ऊँ शन्नो देवीरभिष्टडआपो भवन्तुपीतये। शनयो रविस्र वन्तुनः।

शनिदेवजी का पौराणिक मंत्र :
श्री नीलान्जन समाभासं, रवि पुत्रं यमाग्रजम।
छाया मार्तण्ड सम्भूतं, तं नमामि शनैश्चरम।। सामान्य पूजा के दौरान इसी मंत्र को पढ़ना चाहिए।

अन्य मंत्र :
ॐ सूर्य पुत्राय नम:।
ॐ मन्दाय नम:।
ॐ हलृं श्री शनैश्‍चराय नम:।
ॐ एं हलृशं शनिदेवाय नम:।
ॐ श्रां श्रीं, श्रूं शनैश्‍चराय नम:।



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